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दूर हटा यह अवगुंठन, सूरज की किरणें पड़ने दे...


अवगुंठन (मुंह पर लपेटा हुआ कपड़ा)

दूर हटा यह अवगुंठन
सूरज की किरणें पड़ने दे।
काला अंधियारा हट जाए
बादल में चांद चमकने दे।।

यह अवगुंठन अभिशाप न हो
इसके आड़े कुछ पाप न हो।
झट दूर झटक इसको झ्टपट
मन कुंठित, पश्चाताप न हो।।

अवगुंठित मन की खोल गांठ
जीवन में मधुरस बहने दे।
मन मृदुल वारि सम हो जाए
झरने सा झर - झर झरने दे।।

डा. मिथिलेश राय
जनाड़ी, बलिया, उ.प्र.

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