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मेरे आवरण को मत छेड़ो, छेड़ चुके वह क्या कम है


संरक्षण
वत्स तू मेरा हिस्सा है,
विवेक प्राप्त का किस्सा है।
मेरे आवरण को मत छेड़ो,
छेड़ चुके वह क्या कम है।

प्रच्छन्न युक्ति में विश्वास रख,
समझा कर प्रलय प्रचण्ड।
जाति तेरी जब मानव है तो,
मानवता का ध्यान तू रख।

रहेगी हर्षित आने वाली पीढ़ी,
प्रकृति संरक्षण का ध्यान रखो।
दृग्विषय हो विलुप्त जीवों से,
शुद्ध हवा तो रहने दो।

मत रोको बहती नदियों को,
खनन से खार तो खाया कर।
पूर्ण जीवन मिले वनस्पति को,
मत हटा तू भूमि के गहने,
रोक ले तू प्रदूषण को।
दोहन कम कर संसाधन का
वत्स तू मेरी सर्वोपरि है।
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विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस पर विशेष
रजनीकांत
सहायक अध्यापक
कम्पोजिट विद्यालय चंदुकी
शिक्षा क्षेत्र-हनुमानगंज
जनपद-बलिया

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