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दर्द से आंख ऩम न कर यारा, वक्त गुजरा उसे...


खुद को जीने का हौसला देना,
कोई ग़म हो मुझे बता देना।

दर्द से आंख ऩम न कर यारा,
वक्त गुजरा उसे भुला देना।

अब न कदमों से दूर मंजिल है,
साथ हमदम मेरा निभा देना।

ठान लें ग़र तो ये भी मुमकिन है,
फूल सहरा में भी खिला देना।

हो न बाकी निशां भी जख़्मों का,
इस तरह से ही अब दवा देना।

आ गया जो पनाह में तेरी,
आस देना व आसरा देना।

हाथ में हो तेरे तो यूं करना,
बात बिगड़ी भी तू बना देना।

रजनी टाटस्कर
भोपाल, मध्यप्रदेश

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