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बलिया : पाषाण शिला पर लिख रहे हैं कौशिकेय जी, जल पर खींची राधिका तिवारी की लकीर बनकर बह रही नदी


बलिया। साहित्य, संगीत में राधिका की बनाई राह आज नारी जागरण का राजपथ बन गयी है। जिले की कवयित्री, अभिनेत्री, शिक्षिका श्रीमती राधिका तिवारी एवं साहित्यकार शिवकुमार सिंह कौशिकेय के जन्मदिन पर साहू भवन बलिया में कबीरम् समाज की ओर से आयोजित जन्मोत्सव का शुभारंभ शिवजी पाण्डेय रसराज के सरस्वती वंदना से हुआ। वरिष्ठ साहित्यकार डाॅ जनार्दन राय ने कहा कि राधिका तिवारी जल पर जो लकीर खींची थी, वह नदी बनकर बह रही है। कौशिकेय जी पाषाण शिला पर लिख रहे हैं, जो हमारी अनमोल थाती को भावी पीढ़ी तक पहुंचायेगी। रिष्ठ कवि बृजमोहन प्रसाद अनारी ने पारम्परिक सोहर जुग जुग जिअसु ललनवा भवनवा के भागी जागल हो...  प्रस्तुत किया। युवा कवि शशि प्रेमदेव ने नदियों की वेदना से समाज को जोड़ते हुए कहा 'भोगि रहल बा नाजे केकर करनी कइल नदी, जनमे से रहि गइल पखारत सबकर मइल नदी।'

युवा शायरा डाॅ कादंबिनी सिंह ने 'लुटाके देख तो खुशियां, तुझे यकीं आये कि रखकर जो न हुआ, आज बांटकर होगा... प्रस्तुत कर खूब वाह वाही लूटा। डाॅ प्रदीप श्रीवास्तव, सूर्यदेव तिवारी, शायर शंकर शरण साहिल, बेचूराम कैलाशी, लोकगायक बंटी वर्मा, डॉ शंकर दयाल वर्मा, प्रेमसुख श्रीवास्तव, इमामुद्दीन खां, गुलशन प्रजापति, बादल चौहान, जयप्रकाश यादव, ईश्वरदत्त पाण्डेय आदि कवियों, साहित्यकारों ने अपने फन के माध्यम से इन दोनों के व्यक्तित्व-कृतित्व पर प्रकाश डाला। अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार अशोक जी एवं संचालन डाॅ अरविन्द उपाध्याय ने किया। टीडी कॉलेज के अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष डाॅ सन्तोष कुमार गुप्ता ने आभार ज्ञापित किया।

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