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नवांकुर चित्रकारों की कला साधना देखने पहुंची JNCU बलिया की कुलपति ने की बड़ी घोषणा

बलिया। महर्षि भृगु की तपोभूमि बलिया में इतनी उर्वरा शक्ति है कि यहां की प्रतिभाएं पूरे देश में अपना अलग पहचान बनाई हुई है। मैं यहां के नवांकुर चित्रकारों की कला साधना को देखकर हतप्रभ हूं। ऐसा नहीं लग रहा है कि पांचवी से दसवीं कक्षा के नन्हें चित्रकारों की कलाकृतियां है। इसके लिए संयोजक डॉ. इफ़्तेखार खान के साथ ही प्रशिक्षक इरशाद अहमद अंसारी व मोहम्मद कैफ की प्रशंसा करते हुए कही। 

उक्त बातें मुख्य अतिथि कुलपति प्रो.कल्पलता पाण्डेय ने राज्य ललित कला अकादमी उत्तर प्रदेश लखनऊ द्वारा आयोजित तीन दिवसीय चित्रकला प्रदर्शनी के समापन समारोह के अवसर पर छात्रों को आशीर्वचन देते हुए कही। कहा कि मेरे शिष्य इफ़्तेख़ार ने परिश्रम पूर्वक बलिया में कला का अलख जगाया है और मैं इसके मेहनत को जया नहीं होने दूंगी। बच्चों का उत्साह को देखकर और अपने शिष्य इफ़्तेखार की मांग पर विश्वाविद्यालय में फाइन आर्ट विभाग खोलने जा रही हूं। इसी सत्र जुलाई से इसमें प्रवेश प्रारंभ हो जाएगा। कुलपति प्रो.कल्पलता पाण्डेय ने कहा कि इसके लिए समिति बना दी गयी है, जिसमें बीएचयू वाराणसी के प्रोफेसर एस प्रणाम सिंह, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के प्रोफेसर मंजुला चतुर्वेदी एवं राजकीय इंटर कॉलेज बलिया के कला शिक्षक डॉ. इफ़्तेख़ार खान को सदस्य बना दी हूँ। 

जैसे ही कुलपति ने बलिया में फाइनआर्ट डिपार्टमेंट खोलने की घोषणा की पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा। उन्होंने बाल चित्रकारों से बताया कि मैं जिस विद्यालय सभागार से यह घोषणा कर रही हूं। मैं इसी विद्यालय से प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण की हूँ। अपने संबोधन में उन्होंने राज्य ललित कला अकादमी उत्तर प्रदेश लखनऊ  के सचिव श्री आनंद कुमार (आईएएस) के साथ ही विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. अखिलेश कुमार सिन्हा को भी धन्यवाद दिया, जिनकी बदौलत कार्यशाला का सफल आयोजन हुआ। 

श्री मुरली मनोहर टाउन इंटर कॉलेज बलिया के सभागार में चल रही प्रदर्शनी में सबसे पहले मुख्य अतिथि ने दीप प्रज्वलित कर सरस्वती जी के  चित्र पर माल्यार्पण किया। मुख्य अतिथि के स्वागत के बाद प्रशिक्षक मु. कैफ खान ने अपने हाथों बनाई गई केदारनाथ मंदिर की अनुपम कलाकृति भेंट किये। सुप्रसिद्ध पर्यावरणविद् डॉ. गणेश पाठक ने कहा की मानव के सर्वांगीण विकास एवं व्यक्तित्व विकास में कला की अहम भूमिका होती है। जब वह अपने कलाकृति का निर्माण करता है तो उसकी नजर समाज के मानवीय संवेदना को छूकर अपनी पेंटिंग का निर्माण करता है। उन्होंने कहा कि कला एक साधना है। यह नवांकुर चित्रकार तपती गर्मी में बरामदे में बैठकर अपनी कला साधना किए हैं। डॉ. इफ़्तेखार खान की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि अकादमी के निर्देशानुसाऱ केवल 2 घंटे प्रशिक्षण देना था, किंतु इन्होंने 7:00 से 12:00 बजे तक 6 घंटे लगातार प्रशिक्षण दिया, जिसका परिणाम यह प्रदर्शनी है। प्रो.यशवंत सिंह ने कहा कि चित्र बोलते हैं। उनसे बात करके दो तो देखो, क्योंकि उनमें चित्रकार की आत्मा बसती है। चित्र मूक होते हुए भी अपनी सारी बातें कह देते हैं। इसमें प्रदर्शित सभी चित्र बिल्कुल सजीवन जीवंत प्रतीत होते रहे हैं। 

डॉ.निशा राघव ने कहा कि बलिया के बच्चे कला के क्षेत्र में डॉ.खान के कुशल निर्देशन में लगातार अच्छे कार्य करते हुए बहुत ऊंचाई तक पहुंचे हैं। प्रतिष्ठित संस्थानों कंपनियों में पद पर आसीन होकर बलिया का गौरव बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन कला प्रतिभाओं का विश्वविद्यालय परिसर में प्रतियोगिता करा कर सम्मानित किया जाएगा। संगीत गुरु पंडित राजकुमार मिश्र,सपना पाठक श्रीमती मंजू पाठक, गुलनाज़ तथा इस विद्यालय के अभिषेक, अखिलेश श्रीवास्तव, राजकुमार तिवारी, नवीन तिवारी तथा संजय ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग किया। विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. अखिलेश कुमार सिन्हा ने कहा कि इस तरह के आयोजन से बच्चे परीक्षा में भी अच्छे अंक हासिल कर सकते हैं। गर्मी की छुट्टी में बच्चों के लिए इससे बड़ा तोहफा कुछ हो ही नहीं सकता। इसके लिए राज्य ललित कला अकादमी और को धन्यवाद दिया। 

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