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कठिन परिश्रम और पक्के इरादे से कुछ भी मुमकिन : आपको अहसास करा देंगी IPS दिव्या तंवर की ये कहानी

नई दिल्ली। सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक है। इस परीक्षा में सफलता का प्रतिशत बहुत काम होता है। ज्यादातर उम्मीदवारों का धैर्य इस परीक्षा की तैयारी के दौरान जवाब दे जाता है, जबकि कुछ जीवन में विपरीत परिस्थितयों के बाद भी लक्ष्य पर डटे रहते है। यदि कोई अभावों में होते हुए भी IAS बनना चाह रहा है तो दिव्या की ये कहानी उनके तैयारी के दरबाजे खोल देगी। ये कहानी आपको अहसास करा देंगी कि कठिन परिश्रम और पक्के इरादे से कुछ भी मुमकिन है। 

हरियाणा के महेंद्रगढ़ के गांव निंबी निवासी दिव्या तंवर 5वीं क्लास में नवोदय में एडमिशन ली। 12वीं गणित, फिर बीएससी की। इसी दौरान दिव्या ने UPSC की पढ़ाई के लिए यूट्यूब पर TOPPERS के वीडियो देखें। उनके द्वारा बतायीं किताबें पढ़ना शुरू किया। जरूरत के अनुसार यूट्यूब से गाइडेंस भी लेती रही। यही नहीं, बीएससी होने के बाद एक स्कूल में बच्चों को पढ़ाया भी। घर पर बच्चों को ट्यूशन दी, लेकिन IAS तैयारी जारी रही। 

वह एक कमरे के मकान में अपने माता-पिता और दो छोटे भाई बहन के साथ रहती थीं, जो पहली मंजिल पर है। खाना कमरे के बाहर गैस और चूल्हे पर बनता है। उनका परिवार बहुत साधारण है। गुजर बसर हो जाता है बस। पिछले साल पिता जी के देहांत के बाद उनकी मां ने दूसरों के खेतों में काम कर अपने परिवार का पालन पोषण किया। चूंकि दिव्या ट्यूशन पढ़ा भी रही थी तो खाने और किताबों के खर्चे के लिए ज्यादा समस्या नहीं आयी। UPSC में दिव्या की रैंक 438वीं है। दिव्या ने पहले ही प्रयास में हिंदी माध्यम से सफलता हासिल की है।

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