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परमात्मा तक पहुंचने का माध्यम है वेद, ग्रंथ और उपनिषद : जीयर स्वामी

दुबहर, बलिया। जिले के जनेश्वर मिश्र सेतु एप्रोच मार्ग के किनारे हो रहे चातुर्मास व्रत के प्रथम दिन देर शाम प्रवचन करते हुए महान मनीषी संत श्री त्रिदंडी स्वामी जी के शिष्य लक्ष्मी प्रपन्न जीयर स्वामी जी ने कहा कि ग्रंथों के अध्ययन से जीवन जीने की कला आती है। वेद, ग्रंथ, उपनिषद परमात्मा तक पहुंचने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि सज्जन पुरुष कभी भी अपने कर्म से विमुख नहीं होते हैं। धैर्य मानव जीवन का गुरु है। विपत्ति में कभी भी धैर्य का परित्याग नहीं करना चाहिए।

स्वामी जी ने कहा कि महापुरुष किसी भी परिस्थिति में हमेशा संयमित रहते हैं। संयमित रहने वाला व्यक्ति राष्ट्र और समाज के प्रति चिंतनशील होता है। उन्होंने कहा कि संत और विद्वान के प्रति सबको आदर का भाव रखना चाहिए। जीयर स्वामी जी ने लोगों को जीवन में कर्म की शुद्धि पर बल देते हुए कहा कि जीवन में कर्म ही व्यक्ति को आगे या पीछे ले जाता है। बुरे कर्मों का फल निश्चित रूप से भोगना पड़ता है।  अच्छे कर्म करने वाले व्यक्ति सदियों तक समाज में पूजनीय होते हैं।

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