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मनरेगा मजदूर का बेटा बना IAS : परिस्थितियों से कभी नहीं मानी हार, ऐसे की पढ़ाई

नई दिल्ली। UPSC पास कर जोधपुर के सोहनलाल ने वैसे कैंडीडेट‍्स के लिये नजीर पेश की है, जो अभावों से गुजरते हैं। अनपढ़ माता-पिता के पुत्र सोहनलाल ने परिस्थितियों से कभी हार नहीं मानी, नतीजतन देश की सबसे सम्मानित प्रतियोगी परीक्षा पास कर ली। बिना कोचिंग के चौथी बार में सोहनलाल मुकाम पर पहुंचे है। जोधपुर के तिवरी तहसील के रामपुरा के राम नगर निवासी सोहनलाल के माता-पिता मनरेगा मजदूर है, लेकिन उन्होंने बेटे को पढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।10वीं तक गांव के ही राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में पढ़ाई कर सोहनलाल 11वीं में कोटा चले गए। 12वीं कोटा से पास की। फिर आईआईटी में सलेक्शन हुआ। पिता गोरधन ने बेटे को मुंबई से आईआईटी  करवाई। 2018 में आईआईटी कंप्लीट होने के साथ ही सोहनलाल के सामने कैंपस प्लेसमेंट और सिविल सर्विस का ऑप्शन आया तो उन्होंने प्लेसमेंट को ठुकरा कर सिविल सर्विस की तैयारी करने की ठानी। IAS की तैयारी शुरू कर दी। 4 साल की तैयारी के बाद सोहनलाल यूपीएससी में सफल हुए है। सोहनलाल ने 681वीं रैंक हासिल की है। 

सोहनलाल की संघर्ष गाथा बताते बताते भावुक हुए पिता

सोहनलाल के पिता गोरधन राम की गांव में ही 15 बीघा जमीन है। मां मीरा देवी आज भी मनरेगा में मजदूरी करती है।बड़ा भाई श्रवण और दो बहन वसंत और सुमित्रा है। श्रवण साइबर एक्सपर्ट हैं, जो अमेरिका में रहकर PhD कर रहे हैं। वसंत राजस्थान प्रशासनिक सेवा की तैयारी कर रही है। 

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दूसरी बहन सुमित्रा BEd पास हैं। पिता गोरधन बेटे सोहनलाल के संघर्ष को बताते बताते भावुक हो गए। बोले, मुझे खुशी है कि बेटे ने हमारी मेहनत को सफल कर दिया। आज के जमाने में बच्चे मोबाइल के बिना नहीं रह सकते हैं, लेकिन मैंने बच्चों को जब तक उनकी पढ़ाई नहीं हुई मोबाइल से हमेशा दूर रखा। वे मोबाइल का उपयोग सिर्फ पढ़ने के लिए करते थे। हमें खुशी है कि बेटे ने हमारे परिवार और समाज का नाम रोशन किया है।

तीसरी बार सलेक्शन नहीं हुआ तो जॉब करने की सोची, लेकिन खुद ने मांगा एक और मौका

सोहनलाल ने बताया कि मुंबई आईआईटी से इलेक्ट्रॉनिक्स की पढ़ाई की। इस बीच, एक सीनियर का आईएससी में सलेक्शन हुआ तो पता चला आईएएस क्या होता है। इसके लिए बडे़ भाई श्रवण ने मोटिवेट किया। 2018 में जब प्लेसमेंट आया तो मैंने अप्लाई नहीं किया। भाई ने समझाया कि प्राइवेट नौकरी करनी है तो वो बाद में भी कर लेंगे। 

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इस पर आईआईटी फाइनल ईयर से ही तैयारी शुरू कर दी। पहली बार में इंटरव्यू तक पहुंचा, लेकिन सलेक्ट नहीं हो पाया। दूसरी और तीसरी बार में प्री भी क्लियर नहीं कर सका। चौथी बार में सलेक्शन हुआ। सोहनलाल ने बताया कि तीसरी बार सलेक्शन नहीं हुआ तो जॉब करने की सोची, लेकिन खुद ने एक और मौका मांगा। बताया कि यू-ट्यूब देखकर पढ़ाई करता था। वहीं से नोट्स बनाता। रोजाना 7 से 8 घंटे की पढ़ाई करता।

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