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बलिया में एक शिक्षक ऐसा भी : ग्रीष्मावकाश में अपनाया यह नवाचार, चर्चा हर जुबां पर


बलिया। परिषदीय स्कूलों में पठन-पाठन को रुचिकर बनाने के लिए शिक्षकों की मेहनत से बेसिक शिक्षा में काफी कुछ बदलाव देखने को मिल रहा है। शिक्षक नित कुछ न कुछ अभिनव प्रयोग कर बच्चों का भविष्य संवारने की निरंतर कोशिश भी कर रहे है। ग्रीष्मावकाश में भी बलिया का एक शिक्षक अपने स्कूल के बच्चों को खुद से न सिर्फ जोड़े रखा, बल्कि उन्हें नई तालीम भी दी। शिक्षक की निष्ठा आज हर जुबां पर है। हम बात कर रहे है शिक्षा क्षेत्र नगरा के कंपोजिट विद्यालय वाराडीह लवाईपट्टी के सहायक अध्यापक प्रभाकर गुप्ता की। 

बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग (मैकेनिकल) तमिलनाडु से पासआउट प्रभाकर गुप्ता ने 69000 शिक्षक भर्ती के तहत बेसिक शिक्षा परिषद का अंग बने और स्कूल तथा बच्चों की बेहतरी को सदैव तत्पर रहने लगे। ईमानदार सोच के धनी प्रभाकर गुप्ता ने ग्रीष्मावकाश में समाज को डिजीटल तौर पर नई दिशा देने की कोशिश की। ग्रीष्मावकाश में जहां अन्य शिक्षक छुट्टी इंज्वाय करने की तैयारी में थे, वहीं प्रभाकर गुप्ता ने ग्रीष्मावकाश आरंभ होने के दिन अर्थात 20 मई 2022 से ऑनलाइन शिक्षण प्रारंभ किया, जिसका लाभ स्कूत के 45 बच्चों ने लिया। ऑनलाइन शिक्षण का समापन 15 जून को हुआ, क्योंकि 16 जून से स्कूल खुल रहे है। 

सकारात्मक रहा Summer Study का प्रयास

भीमपुरा थाना क्षेत्र के बरवां रत्ती पट्टी गांव निवासी प्रभाकर गुप्ता ने ग्रीष्मावकाश में संचालित ऑनलाइन शिक्षा से जुड़े अनुभव पूर्वांचल24 के साथ साझा किया। बताया कि ऑनलाइन शिक्षा की वजह से बच्चों में पढ़ाई की निरंतरता बनी रही। मेरे व छात्र-छात्राओं के बीच समन्वय बना रहा। नए सत्र के आरंभ होने अर्थात 01 अप्रैल 2022 से 19 मई 2022 के दौरान पढ़ाए गए पाठयक्रम को दोहराना और आगे के कोर्स को अध्ययन कराने के साथ-साथ बुनियादी शिक्षा को लेख, छायाचित्र, वीडियो के साथ अभिव्यक्त व प्रत्येक बच्चे के किए गए कार्य का मूल्यांकन तथा त्रुटि सुधार, संदेह को दूर करने के अलावा चित्रकला प्रतियोगिता को पूरा करने के लिए यह ऑनलाइन कक्षा सकारात्मक रही।


इस ऑनलाइन कक्षा से बच्चों ने तकनीक के इस्तेमाल के नवीन तरीके सीखें हैं। भविष्य को देखते हुए वर्क फ्रॉम होम की भी बच्चों में आदत पड़ी है। शिक्षा प्रणाली की इस नई व्यवस्था पर बच्चे ऑनलाइन कक्षा के जरिए खुद को ढाल रहे हैं। ऑनलाइन कक्षा से मैंने भी पढ़ाई कराने का नया नायाब तरीका सीखा। भविष्य में ऑनलाइन पढ़ाई से संबंधित मेरा कई और प्रयोग करने की तैयारी है। अभिभावकों के सामने ही चल रही कक्षा से वह भी बच्चों का आसानी से आकलन कर पा रहे हैं।

चित्रकला प्रतियोगिता में आंचल ने मारी बाजी

ऑनलाइन चित्रकला प्रतियोगिता में सभी बच्चों ने भरपूर उत्साह के साथ प्रतिभाग किया। सभी बच्चों का प्रयास उत्कृष्ट एवं सराहनीय रहा। इस प्रतियोगिता में आंचल सैनी प्रथम (कक्षा-05), दिव्या शर्मा द्वितीय (कक्षा-06) एवं लाडली ठाकुर तृतीय (कक्षा-04) स्थान पर रहीं। अन्य सभी बच्चे जिनके चित्र इनमें नहीं चुने गए, उनके हौसले को सैल्यूट किया गया। उन्हें सुझाया गया कि जिस प्रकार चींटी दाना लेकर जाते हुए बार-बार गिरती है, फिर भी अपना प्रयास नहीं छोड़ती और अंत में सफल होती है। ठीक उसी प्रकार आप सबको अपना प्रयास और अभ्यास निरन्तर जारी रखना है। निश्चय ही आप सभी लोग भी अपनी मंजिल को पा लेंगे। बताया कि ऑनलाइन क्लासेज और चित्रकला प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाले सभी विद्यार्थियों को विद्यालय खुलने पर उत्साहवर्धन के रुप में पुरस्कार भेंट कर के सम्मानित किया जायेगा।

बच्चों के जुबानी
मोबाइल से पढ़ने में हमें बहुत मजा आता है। हम लोग रोज अपना होमवर्क कर के व्हाट्सऐप पर सर जी से चेक कराते हैं।
हुजैफ छात्र
कक्षा-03

ऑनलाइन क्लास के अतिरिक्त सर के ऑनलाइन चित्रकला प्रतियोगिता से मैं बहुत खुश हूं। इससे मुझे आगे बढ़ने की प्रेरणा मिल रही है।
अमायरा छात्रा
कक्षा-04

गर्मी की छुट्टी में सर द्वारा चलाई गई ऑनलाइन "समर स्टडी" क्लासेज को मैं अपने घर पर रहते हुए लिया। हम खुद अनुशासन में रहना सीख रहे हैं।
अंश छात्र
कक्षा-05

अभिभावकों का विचार
ऑनलाइन "समर स्टडी" क्लासेज एक बेहतर प्रयास है, बच्चों को छुट्टियों के दौरान भी शिक्षा से जोड़े रहने का। वर्तमान में हमारे दो बच्चे इस ग्रुप से लाभान्वित हो रहे हैं, जिससे हम अत्यंत प्रसन्न हैं।

रेखा जी 
अदवय की माता जी

ऑनलाइन "समर स्टडी" क्लासेज के माध्यम से बच्चों को पढ़ाने की ललक से हम बहुत खुश हैं। सर जी की मेहनत और लगन काबिल-ए-तारीफ है। हमारे तीन बच्चे इस ग्रुप के माध्यम से पढ़ाई कर रहें हैं।
सुनीता जी
कुनाल की माता जी

सर द्वारा चलाई गई इस ऑनलाइन क्लास के लिए बच्चों के साथ बैठना पड़ता है तभी वो पढ़ते है, ऑनलाइन ई-लर्निंग पद्धति मेरे और मेरे बच्चों के लिए एक नया अनुभव रहा।
मुन्ना जी
आशु के पिता जी

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