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बलिया : क्या समय से पूरी हो पायेगी बाढ़ व कटान से सुरक्षा वाली यह पांच परियोजनाएं, उठने लगा सवाल

रामगढ़, बलिया। एनएच 31 व गंगा के मुहाने पर बसे गांवों को बचाने लिए करीब 55 करोड़ की लागत से 5 परियोजनाओं पर काम चल रहा है। लेकिन ठेकेदारों की लापरवाही और विभागीय अधिकारियों उदासीनता की वजह से अब तक कटान रोधी कार्य मूर्त रूप नहीं ले पाया है, जबकि मानसून आने में मात्र एक सप्ताह ही शेष बचा है। यही नहीं, 09 जून को गंगा दशहरा भी है। बावजूद इसके कार्य की धीमी रफ्तार समझ से परे है। यह देख तटीय लोग सहमे है। उनका कहना है कि यदि यही हाल रही तो बाढ़ में स्थिति भयावह होने की सम्भावना प्रबल है।

बताते चले कि इस बार सीएम योगी के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत जनपद बलिया को बाढ़ व कटान से बचाने के लिए ₹126 करोड़ रुपए की लागत से कुल 19 परियोजनाओं की स्वीकृति मिली है। इसमें 5 परियोजनाएं रामगढ़ से लेकर दुबे छपरा तक स्वीकृत है। रामगढ़ से दुबे छपरा तक दो ठोकर, रीवेटमेंट पर्कयुपाइन विधि द्वारा कटान रोधी कार्य शामिल है। पर, संसाधन व मजदूरों के अभाव में काम मंद गति से चल रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि बाढ़ विभाग जानबूझकर कार्यो में शिथिलता बरत रहा है, ताकि बाढ़ का समय आ जाए तो प्लड़ फाइटिंग के नाम पर पुराना खेल खेलने का मौका मिल सकें।

कार्यों की प्रगति की स्थिति यह है कि अभी 50% भी पूरा नहीं हो पाया है। विभाग पहले अधिकारियों को यह आश्वासन दे रहा था कि हर हाल में 15 जून तक सभी कटान निरोधी कार्य कर लिए जाएंगे, लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर इन 7 दिनों के अंदर बाढ़ विभाग व ठेकेदार 50% काम को कैसे पूरा कर पाएंगे? यही स्थिति हर साल की रहती है। गंगा का जलस्तर बढ़ने लगता है और ठेकेदार बीच में ही काम छोड़कर फरार हो जाते हैं। ठेकेदारों को बचाने में बाढ़ विभाग जी जान से जुट जाता है। बाढ़ के समय फ्लड फाइटिंग के नाम पर करोड़ों रुपए पानी में बहा दिए जाते है। बावजूद इसके लापरवाह ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई करने की बजाय विभाग उन्हें पुनः कटान रोधी कार्य सौंप देता है।

गंगा के मुहाने पर बसे गांव के लोगों का कहना है बाढ़ विभाग चाहे कुछ भी दावा करे, पर इस बार भी पिछले साल जैसी स्थिति होती दिख रही है। उनका कहना है कि गंगा दशहरा के बाद गंगा के जलस्तर में वृद्धि होना शुरू हो जाता है। साथ ही 15 जून को मानसून आ जाता है। पिछले साल यही स्थिति गंगापुर से लेकर चौबे छपरा तक रही। ठेकेदार काम को बीच मझधार में छोड़ कर चले गए और जो काम 3 माह में पूरा होना था वह एक साल बाद पूरा हुआ। संजोग अच्छा रहा कि गंगा नदी की लहरें कुछ नरम रही। फिर भी उदई छपरा व गोपालपुर में करीब दो दर्जन मकान नदी में समा गई थी। 

बाढ़ विभाग सोनपुर के चीफ डीके पांडुआल व सिंचाई विभाग वाराणसी के अधीक्षण अभियंता एसएन शर्मा ने बुधवार की सुबह रामगढ़ से लेकर दुबे छपरा तक चल रही परियोजनाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने पत्रकारों को कुछ भी बताने से परहेज किया। कहा कि मैं अपने काम से आया हूं। मैं अपना काम कर रहा हूं। इसकी समीक्षा कर अपने उच्च अधिकारियों को अवगत कराऊंगा। चीफ सोनपुर के निरीक्षण को लेकर कटान पीड़ितों में तरह-तरह के चर्चे सुनने को मिले। इस बाबत बाढ़ विभाग के अधिशासी अभियंता संजय कुमार मिश्र ने बताया कि सोनपुर चीफ ने इन परियोजनाओं का निरीक्षण किया। कार्यों की गुणवत्ता को देखा और इससे संबंधित दिशा निर्देश भी दिया। उन्होंने बताया कि हर हाल में 30 जून से पहले सभी कटान रोधी कार्य पूर्ण कर लिए जाएंगे। इस बार तय समय के अंदर जिस ठेकेदार का कार्य पूर्ण नहीं होगा, उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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