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'फन विद लर्न' के साथ सनबीम बलिया का पांच दिवसीय 'फुल स्वींग' सम्पन्न : संचित स्मृतियों को हर्षित मन से सहेजता दिखा हर चेहरा

बलिया। अवसर था सनबीम स्कूल बलिया में पांच दिन से चल रहे समर-कैम्प फुल स्वींग समापन समारोह का... उत्साह और जोश अपने चरम पर था। उमंग और उत्साह से लबरेज हर कोई था। शिक्षक हो या छात्र, सभी इस समर-कैम्प में बिताए मधुर स्मृतियों को ज्यादा से ज्यादा अपने मन-मानस में समेट लेना चाहता था। हालांकि, उनके चेहरों पर थोड़ी मायूसी भी झलक रही थी, क्योंकि आज के बाद उनकी गर्मियों की छुट्टियां शुरू हो रही थी। उनके मन में सहपाठियों और शिक्षकों से कुछ दिन नहीं मिलने का मलाल था। मानव मन और ज्यादा पा लेने के लिए हमेशा विचलित रहता है और ये तो बच्चों के लिए 'फुल ऑन मस्ती' का समय था तो कैसे ना विचलित होता। 

सनबीम स्कूल द्वारा यह कैंप बच्चों के संपूर्ण विकास को ध्यान में रखकर तथा उनमें शिक्षा के प्रति रुचि बनाए रखने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। इसमें पुस्तकीय ज्ञान के अतिरिक विभिन्न अनूठे और आकर्षक कौशलों को छात्रों में विकसित तथा शिक्षा को और अधिक रुचिकर बनाये जाने की सार्थक कोशिश की गई। यह कैंप 17 से 21 मई तक आयोजित किया गया था। प्रथम दिन से लेकर अंतिम दिन तक बच्चों ने पूरे उत्साह एवं जोश के साथ अनेकों गतिविधियों जैसे -नॉनथर्मल कुकिंग, पैजामा पार्टी, साइंस मॉडल मेकिंग, रेन डांस, पाॅट मेकिंग, पेंटिंग, क्रिएटिव ओलंपियाड आदि का आयोजन 'लर्न विद फन' के साथ आयोजित किया गया।


विद्यालय प्रांगण में आयोजित इस कैंप में बच्चों के हेल्थ एवं फिटनेस को ध्यान में रखकर प्रतिदिन योग एवं मेडिटेशन की भी ट्रेनिंग दी गई, ताकि वो अपने गर्मियों की छुट्टियों में इसका समुचित उपयोग कर सकें। कैंप के दौरान बच्चों में नैतिक मूल्यों के विकास हेतु तथा उनमें 'टेबल मैनर्स और एटिक्वेट' विकसित करने के लिए उन्हें जिले के प्रसिद्ध रेस्टोरेंट में भोजन करा कर फूड एटिकेट सिखाया गया। कैंप के अंतिम दिन बच्चों के लिए मुख्य आकर्षण रहा शहर के नजदीक स्थित वाटर पार्क का भ्रमण, जहां बच्चों ने इस तपती गर्मी से निजात पाकर जमकर मौज मस्ती की।

बाल्यकाल, मानव जीवन का सबसे महत्वपूर्ण एवं खुबसूरत काल : डॉ. कुंवर अरुण सिंह 

कैंप के समापन पर विद्यालय के निदेशक डॉ कुंवर अरुण सिंह ने कहा कि बाल्यकाल संपूर्ण मानव जीवन का सबसे महत्वपूर्ण एवं खुबसूरत काल है, जिसकी स्मृतियां जीवनपर्यंत उत्साहित एवं आनंदित करती है। इसी उम्र में बच्चों को सही ढांचे में ढाला जा सकता है, उन्हें सही दिशा निर्देशन देकर। शिक्षक ही वह वास्तविक शिल्पकार है, जो गीली मिट्टी रूपी अपने विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकसित कर, सही आकार और प्रतिरूपण करता है। उन्होंने बच्चों को ग्रीष्मावकाश के समय को सही ढंग से व्यतीत करने और ऊर्जावान बने रहने की प्रेरणा दी। कहा कि आज आपके हर्षित और उल्लासित चेहरों की मधुर स्मृतियों को सजों कर, हमारे लिए भी इन छुट्टियों में जोश और जज्बा बनाए रखते हुए आपके पुनः वापस स्कूल आने के इंतजार की राह को आसान बनाने में मदद मिलेगी।

विद्यार्थी जीवन का एक-एक पल कीमती : प्रधानाचार्य

विद्यालय की प्रधानाचार्या डॉ अर्पिता सिंह ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि विद्यार्थी जीवन का एक-एक पल कीमती होता है। इसलिए आपको इस लंबे अवकाश के समय में खेलकूद, पढ़ाई तथा कौशलों को सीखने में बिताना है। विद्यालय द्वारा दिए गए गृहकार्य व शोध कार्य को भी लगन से पूरा करना है। इस भीषण गर्मी से बचने के लिए भी आवश्यक टिप्स उन्होंने बच्चों को दिए। विद्यालय के समस्त विद्यार्थी अपने ग्रीष्मावकाश को लेकर अत्यंत उत्साहित थे।

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