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मां तेरे बारे में मैं क्या लिखूं, जिसकी लिखावट मैं खुद हूं...


मॉं
माँ तेरे बारे में मैं क्या लिखूं।
जिसकी लिखावट मैं खुद हूं।।
माँ का एक दिवस क्या मनाऊं।
जिसका हर दिवस हर क्षण मैं हूं।।

माँ के बारे में क्या लिखूं 
जिसने खून की बूंद को दूध बनाकर पिलाया।
अपने भले भूखी रहे, लेकिन पहला निवाला अपने सन्तान को ही खिलाया।।

माँ के बारे में लिखने के लिए,
इतना कागज कहा से आएगा।
अजीत समस्त समंदर को भी स्याही बना देगा, तू लेकिन माँ के गुणों को नहीं लिख पायेगा।।

माँ शब्द ही अपने में पूरा संसार है,
चाहे हिन्दू हो या मुस्लिम।
माँ किसी के लिए गीता तो किसी के लिए कुरान है।।

माँ से ही ये धरती माँ से ही ये जहान है,
माँ शब्द ही सब कुछ है अपने में।
अजीत माँ के बारे में लिखने का प्रयास करता है तू कितना नादान है।

अजीत कुमार सिंह
प्रधानाध्यापक
कंपोजिट विद्यालय गांधीनगर
बेरूआरबारी, बलिया

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