To Learn Online Click here Your Diksha Education Channel...


ads booking by purvanchal24@gmail.com

बलिया में सड़क पर जिंदगी : कुछ कीजिएं सरकार, यहां कोई नहीं पूछनहार


शिवदयाल पांडेय 'मनन'
बैरिया, बलिया। 'रहने को घर नहीं, सोने को बिस्तर नहीं, अपना खुदा है रखवाला...।' उक्त फिल्मी गाना पिछले एक दशक से राष्ट्रीय राजमार्ग 31 की पटरियों पर शरण लिए केहरपुर, गोपालपुर, उदय छपरा, सुघर छपरा के कुल 149 कटान पीड़ित परिवारों पर सठीक बैठ रहा है। सरकार की उदासीनता के चलते उन्हें जमीन खरीद कर बसाने का मामला अधर में लटका हुआ है। तहसील प्रशासन कह रहा है कि पास में ही ग्राम समाज की जमीन खोजी जा रही है। मिलते ही उन्हें वहां बसा दिया जाएगा, अन्यथा की स्थिति में जमीन खरीदने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

पिछले कई वर्षों में न तो ग्राम समाज की जमीन तहसील प्रशासन तलाश कर सका। ना ही उनके लिए जमीन आवंटन करने हेतु जमीन खरीदने के लिए प्रक्रिया शुरू की है। ऐसे में खानाबदोशो की जिंदगी जी रहे 149 परिवारों के सैकड़ों लोग रोज जोखिम भरी जिंदगी जी रहे हैं ।आए दिन यहां बच्चे दुर्घटना के शिकार हो जाते हैं। क्योंकि उन्हें घर से एनएच 31 पर ही निकलना है। ऐसे में कैसे उन्हें सुरक्षित आशियाना मिल पाएगा। यह प्रश्न सुरसा की तरह मुह बाये खड़ा है।

सन 2017 में दूबे छपरा मे रिंग बाध टुटने की सूचना पर मुख्यमंत्री कटान की स्थिति और बाढ़ से हुए नुकसान का जायजा लेने के लिए दुबे छपरा पहुंचे थे। तब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह घोषणा की थी कि 24 घंटे के भीतर कटान पीड़ितों को गृह अनुदान दिया जाएगा। और तीन महीने के भीतर उन्हें जमीन खरीद कर बसा दिया जाएगा। किन्तु अधिकारियों ने मुख्यमंत्री की घोषणा को गंभीरता से नहीं लिया। फलस्वरुप आज भी कटान पीड़ित सड़क की पटरियों पर बसेरा बनाए हुए हैं। 

कांग्रेस नेता विनोद सिंह ने कई बार शासन व प्रशासन के लोगों से मिलकर इस बाबत आग्रह कर चुके हैं। बताया है कि ग्राम समाज की जमीन उपलब्ध नहीं है। इसलिए नियमानुसार जमीन खरीद कर बसाया जाए। लेकिन अधिकारियों ने उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया है। एक सप्ताह पूर्व सांसद नीरज शेखर ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर कटान पीड़ितों की स्थिति पर सहानुभूति पूर्वक विचार करते हुए उन्हें तत्काल बसाने के लिए उचित कार्रवाई करने का सुझाव दिया है।

लैप्स हो गया गृह अनुदान

वहां के कटान पीड़ितों को गृह अनुदान देने के लिए एडीएम वित्त के पास रुपए आए थे, किंतु तहसील प्रशासन द्वारा पिछले 31 मार्च तक सूची नहीं भेजने के कारण वह पैसा लेप्स हो गया। पूछने पर उन दिनों के उप जिलाधिकारी आरके मिश्र ने बताया कि दैवीय आपदा लिपीक की लापरवाही से यह पैसा लेप्स हुआ है।

बैरिया तहसील प्रशासन पर फोड़ा ठीकरा

श्रीनगर निवासी मोहन मिश्रा ने सीधे-सीधे कटान पीड़ितों की दुर्दशा का ठीकरा बैरिया तहसील प्रशासन पर फोड़ते हुए कहा है कि वहां के अधिकारियों को लगता है, कि अपने घर से पैसा देकर जमीन खरीदना हो। इसलिए जमीन नहीं खरीदा जा रहा है। हम लोग खानाबदोश की जिंदगी जी रहे हैं। इसी गांव के बद्री गोड़ का कहना है यहां कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है। कोई अधिकारी हम लोगों का हाल जानने के लिए नहीं आते हैं। हम लोग तो अपने भाग्य से जीते है, लेकिन जिए तो जिए कैसे।

किसी ने नहीं दिया ध्यान

सुनीता देवी ने कहा कि यहां के जो भी विधायक हुए हैं। इस प्रकरण को गंभीरता से नहीं लिया है। इसलिए हम लोग बदहाली को प्राप्त है।

राजकुमार का दर्द

राजकुमार का कहना है कि इसी सड़क के रास्ते एसडीएम, डीएम, मंत्री, विधायक, सांसद सभी जाते हैं। कोई हम लोगों के तरफ गाड़ी का शीशा खोलकर झांकना भी नहीं चाहता। हम लोग पूरी तरह से भगवान भरोसे हैं।उन्होंने विनोद सिंह का चर्चा जरूर किया। कहा हम लोगों के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।

विधान सभा में उठाऊंगा मुद्दा

सपा के बैरिया विधायक जयप्रकाश अंचल ने उदयी छपरा आदि के कटान पीड़ितों के दर्द को महसूस करते हुए बताया है, कि यह मामला बहुत ही गम्भीर है। मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ की घोषणा को अधिकारियों ने गंभीरता से नहीं लिया।नहीं तो उन्हें बसा दिया गया होता। लेकिन इस मामले में मैं चुप बैठने वाला नहीं हूं। विधानसभा सत्र के दौरान इसे सरकार के समक्ष पूरी दमदार इसे उठाऊंगा।

बोले नवागत उप जिलाधिकारी 

नवागत उप जिला अधिकारी राहुल कुमार यादव ने ने बताया कि यह  मामला मेरे तैनाती के बाद  आया है। राजस्व टीम गठित कर सरकारी जमीन खोजी जाएगी। जमीन नहीं मिलने की दशा में जमीन खरीद कर कटान पीड़ितों को बसाने का प्रयास किया जाएगा। इस मामले को गंभीरता से लिया जाएगा।

Post a Comment

0 Comments