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बलिया में कुछ यूं मना विश्व रेड क्रास डे, 85 महिलाओं को मिला खास उपहार

बलिया। विश्व रेड क्रास दिवस पर इंडियन रेड क्रास उत्तर प्रदेश की पदेन प्रमुख अध्यक्ष/राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने रेडक्रास भवन लखनऊ में प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का लाइव स्ट्रीमिंग सभी जनपदों में NIC के माध्यम से जूम मिटिंग द्वारा किया गया। इसमें सभी जनपदों के जिलाधिकारी, सीएमओ तथा रेड क्रास के जनपद इकाई के पदाधिकारी शामिल हुए। कार्यक्रम के बाद कम्पोजिट तहसीली स्कूल (बेसिक कार्यालय बलिया) में सीएमओ डॉ नीरज पांडेय एवं एसीएमओ डॉ आनंद द्वारा 85 जरुरतमंद महिलाओं को किचन सेट दिया गया।

सीएमओ डॉ नीरज ने विश्व रेड क्रॉस दिवस पर चर्चा की। बोले, यह हर साल 8 मई को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस और रेड क्रिसेंट आंदोलन के सिद्धांतों को याद करना है। वर्ल्ड रेड क्रॉस डे का उद्देश्य असहाय और घायल सैनिकों और नागरिकों की रक्षा करना है। ये दिवस 8 मई को हेनरी डुनेंट की जयंती पर मनाया जाता है, जो रेड क्रॉस की अंतर्राष्ट्रीय समिति के संस्थापक थे। इस दिन लोग इस मानवतावादी संगठन और उसकी ओर से मानवता की सहायता के लिए अभूतपूर्व योगदान के लिए श्रद्धांजलि देने के लिए याद करते हैं।

रेड क्रॉस एक इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन है। इसका हेडक्वाटर स्विटजरलैंड के जिनेवा में स्थित है। इंटरनेशनल कमेटी ऑफ रेड क्रास और कई नेशनल सोसाइटी मिलकर इस संस्था का संचालन करती है। पिछले कुछ दो सालों से जारी कोविड-19 महामारी में रेड क्रॉस आंदोलन की अहमियत और भी अधिक प्रासंगिक हो गई है।

वर्ल्ड रेड क्रॉस डे के महत्व पर डाला प्रकाश

जिला समन्वयक शैलेन्द्र कुमार पाण्डेय ने कहा कि वैसे तो वर्ल्ड रेड क्रॉस सोसाइटी का काम हमेशा जारी रहता है। किसी भी बीमारी या युद्ध संकट में इनके वॉलेंटियर्स लोगों की सेवा में तत्पर रहते हैं। लेकिन कोरोना महामारी के काल में इनका काम और बढ़ गया। कोविड को हराने के लिए रेड क्रॉस युद्धस्तर पर काम कर रही है। इस संस्था से जुड़े लोग कोरोना से बचाव हेतु दुनियाभर में जरूरतमंद लोगों की सेवा कर रहे हैं। लोगों को मास्क, दस्ताने और सैनिटाइजर बांट रहे हैं।

यह है वर्ल्ड रेड क्रॉस डे का इतिहास 

उप सभापति विजय कुमार शर्मा व रेड क्रास के संरक्षक सदस्य जितेंद्र सिंह ने वर्ल्ड रेड क्रॉस डे के इतिहास पर प्रकाश डाला। कहा कि रेड क्रॉस सोसाइटी की अहमियत उसके इतिहास में छिपी है। स्विटजरलैंड के कारोबारी जीन हेनरी ड्यूनेंट 1859 में इटली में सॉल्फेरिनो का युद्ध देखा, जिसमें में बड़ी तादात में सैनिक मरे और घायल हुए थे। किसी भी सेना के पास घायल सैनिकों की देखभाल के लिए क्लिनिकल सेटिंग नहीं थी। ड्यूनेंट ने वॉलेंटियर्स का एक ग्रुप बनाया, जिसने युद्ध में घायल जवानों तक खाना और पानी पहुंचाया. इतना ही नहीं इस ग्रुप ने उनका इलाज कर उनके परिजनों को चिट्ठियां भी लिखीं। बताया कि जिनेवा पब्लिक वेल्फेयर सोसायटी ने फरवरी 1863 में एक कमेटी का गठन किया, जिसकी अनुशंसा पर अक्टूबर 1863 में एक विश्व सम्मेलन किया गया। इसमें 16 राष्ट्रों के प्रतिनिधि शामिल हुए, जिसमें कई प्रस्तावों और सिद्धांतों को अपनाया गया। इसके बाद 1876 में कमेटी ने इंटरनेशनल कमेटी ऑफ द रेड क्रास (ICRC) नाम अपनाया। इस अवसर पर डॉ पंकज ओझा, डॉ अमित कुमार, शशीकांत ओझा, निर्मला सिंह, सुनीता तिवारी, सरदार सुरेन्द्र सिंह खालसा आदि उपस्थित रहे।

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