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10 दिन में घर से निकली दो अर्थी : बलिया में पिता के बाद पुत्र की मौत, मचा कोहराम

रेवती, बलिया। बेटे की बीमारी और आर्थिक तंगी का सदमा पिता नहीं झेल सके और 9 मई को उनकी सांसे थम गई थी। वहीं, बीमार बेटा भी पिता की तेरही से पहले ही दुनिया छोड़ दिया। 10 दिन के अंतराल में पिता-पुत्र की मौत से हर कोई हतप्रभ है। गरीबी और बदनसीबी के तपते रेगिस्तां में पहले से तप रहा यह परिवार अब पूरी तरह असहाय हो गया है। 

6 मई को रेवती नगर पंचापत के वार्ड नंबर 10 निवासी जितेंद्र तुरहा (40) पुत्र शिवजी तुरहा को अचानक सिर में तेज दर्द की शिकायत के साथ बुखार हो आया। परिजन उसे लेकर सीएचसी रेवती पहुंचे, जहां प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उसे जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया था। बलिया जाने के लिए एंबुलेंस को सूचना दी गई थी। काफी विलंब हो जाने के पश्चात परिजन उसे ठेला पर ही सुलाकर बलिया के लिए निकल पड़े थे। इस बीच समाजसेवियों द्वारा एक आटो उपलब्ध कराया गया। जिला चिकित्सालय से जितेन्द्र को चिकित्सकों ने वाराणसी के लिए रेफर कर दिया था, जहां हास्पिटल में उसका उपचार चल रहा था। 16 मई को मरीज जितेन्द्र को चिकित्सकों ने 10 दिन बाद पुनः दिखाने का सुझाव देकर डिस्चार्ज कर दिया था। बुधवार को जितेन्द्र की तबियत अचानक ज्यादा बिगड़ गयी। परिजन उसे वाराणसी लेकर जा रहे थे। इसी बीच चितबडा़गांव के आस पास उसकी मौत हो गयी।

जानकारी हो कि इस प्रकरण को लेकर सीएचसी रेवती पर स्टाफ एवं ग्रामीणों द्वारा एक दूसरे के विरोध में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया गया था। संज्ञान में लेते हुए उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने प्रकरण की जांच तथा दोषियों के विरुद्ध करने का आदेश सीएमओ बलिया को दिया था। घटना दिन ही जितेन्द्र के पिता 65 वर्षीय शिव जी तुरहा को हल्का हार्ट अटैक आया था, जिसकी दवा चल रही थी। एक मात्र पुत्र के वाराणसी अस्पताल में जीवन-मृत्यु के बीच संघर्ष का प्रभाव पिता शिव जी के ऊपर इतना पड़ा कि 09 मई को उनकी मौत हो गयी थी। जितेन्द्र की मौत के बाद पत्नी लक्ष्मीना सहित ससुराल से आई बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है। बेटी 10 वर्षीय पूजा के बाद कुल चार पुत्रियां तथा एक पुत्र छोड़ कर जितेन्द्र गये हैं।

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