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बलिया : 'पृथ्वी मां की तरह, रक्षा के लिए करना होगा जीवन शैली में परिवर्तन

बलिया। विश्व पृथ्वी दिवस (World Earth Day) पर डायट पकवाइनार बलिया के ऑडिटोरियम में पर्यावरण जागरूकता को लेकर जिले के 57 डीएलएड कॉलेजों के प्रशिक्षुओं की ऑनलाइन क्विज प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसमें आकांक्षा गुप्ता को प्रथम, विभा वर्मा को द्वितीय तथा वंदना सिंह को तृतीय पुरस्कार मिला। वहीं, क्विज में टॉप 14 प्रशिक्षुओं को विचार व्यक्त करने का अवसर दिया गया। कार्यक्रम में शामिल सभी को ज्यादा से ज्यादा लोगों को जागरूकता करने की शपथ दिलाई गई।

पृथ्वी को स्वच्छ व हरा भरा रखने के लिए आयोजित विचार गोष्ठी में बेसिक शिक्षा अधिकारी शिव नारायण सिंह ने प्रशिक्षुओं को ग्लोबल वार्मिंग, कार्बन उत्सर्जन, पेड़ पौधों के महत्व को बताया। कहा कि पर्यावरण को बचाए रखने के लिए जहां साफ-सफाई बेहद जरूरी है, वही वृक्षारोपण भी अहम है। ऐसा ना होने पर पर्यावरण को खतरा है। वरिष्ठ प्रवक्ता मनीराम सिंह ने कहा कि कोई भी लक्ष्य मनुष्य के साहस से बड़ा नहीं है। अगर हम कुछ भी ठान लें तो उस लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। पुनः धरती मां को स्वच्छ और सुंदर बना सकते हैं। प्राचार्य बिकायल भारती ने कहा कि जीवन शैली में परिवर्तन कर ही हम धरती को बचा सकते हैं। सभी प्रशिक्षुओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि हमें अब करके दिखाने का वक्त आ गया है।

कार्यक्रम आयोजक शैलेंद्र ने अपने भागीरथी प्रयास के 593वें दिन (जिसमें वह एक पौधा प्रतिदिन समाज के सभी वर्गों को देकर पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करते है) कहा कि इसमें बच्चों को जितना जोड़ा जाए उतना ही हम सफल होंगे। इस कार्यक्रम को पूर्णता प्रदान करने में समन्वयक अविनाश सिंह प्रवक्ता ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि हम संकल्प लें कि ऊर्जा के संसाधनों के यथा उचित उपयोग करे। अभिषेक सिंह ने सिंगल यूज प्लास्टिक और वृक्षारोपण के प्रति लोगों को जागरूक करने की बात कही। एआरपी राजेश यादव, संतोष वर्मा, सुरेंद्र चौहान ने तकनीकी सहायता तथा प्रवक्ता अनुराग यादव ने सतत विकास अवधारणा पर अपना विचार दिया। निजी महाविद्यालयों के प्राचार्य एवं विभागाध्यक्ष, दिवाकर सिंह लिपिक आदि की उपस्थिति में कार्यक्रम की गुणवत्ता और भी बढ़ गई। सभी प्रशिक्षुओं ने अपनी भागीदारी से कार्यक्रम को सफल बनाया।

पहले से ज्यादा जागरूक होने की जरूरत : डॉ. अनिल

डॉ अनिल सिंह सेंगर ने कहा कि पूरे ब्रह्मांड में पृथ्वी एकमात्र ग्रह है, जहां जीवन संभव है।भारतीय संस्कृति में पृथ्वी माता के समान पूज्य हैं।पृथ्वी पर जीवन को जारी रखने के लिए अपनी माता की तरह पृथ्वी की रक्षा करना हमारा धर्म है। ऐसे में पृथ्वी से जुड़ी पर्यावरण की चुनौतियों (जैसे क्लाइमेट चेंज, प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिंग और जैवविविधता) संरक्षण के प्रयास को लेकर हमें पहले से ज्यादा जागरूक होने की जरूरत है। 

निर्णायक मंडल

निर्णायक मंडल में खंड शिक्षा अधिकारी नगरा निर्भय नारायण सिंह, रसड़ा हिमांशु मिश्रा, सुनीता यादव एवं रोली सिंह सहायक अध्यापिका शामिल रहीं।

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