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'एक प्यार का नग़्मा है' जैसे सुपरहिट गीत देने वाले गीतकार संतोष आनंद को जन्मदिन की बधाई


एक प्यार का नग़्मा है... मैं ना भूलूंगा... तेरा साथ है तो..., मेघा रे मेघा..., ये गलियां ये चौबारा..., पुरवा सुहानी आई रे..., पीले पीले ओ मोरे राजा..., ये शान तिरंगा और मारा ठुमका बदल गई चाल मितवा... जैसे सैकड़ों गाने लिखने वाले गीतकार संतोष आनंद ने हिंदी सिनेमा को 'एक प्यार का नग़्मा है' जैसे सुपरहिट गीत दिए हैं। वर्ष 1974 में फिल्म रोटी, कपड़ा और मकान के लिए भी कई गीत लिखे थे। इस फिल्म के गीत 'मैं ना भूलूंगा...' के लिए इन्हें अपने करियर का पहला फिल्म फेयर अवार्ड मिला था। 1981 में इन्होंने क्रांति फिल्म के लिए गीत लिखे थे, जो उस वर्ष की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी। इसी साल इन्होंने फिल्म 'प्यासा सावन' के लिए गीत 'तेरा साथ है तो...' और 'मेघा रे मेघा...' लिखा। फिर इन्हें 'प्रेम रोग' फिल्म के गीत के लिए फिल्म फेयर अवार्ड से सम्मानित किया गया। 2016 में यश भारती पुरस्कार से सम्मानित भारतीय गीतकार संतोष आनंद आज 93 साल के हो गये। दो बार फिल्मफेयर पुरस्कार और यश भारती से सम्मानित श्रद्धेय संतोषानन्द जी को Purvanchal24 परिवार की ओर से जन्मदिन की हार्दिक बधाई।

1.
एक प्यार का नग्मा 
है मौजों की रवानी है
ज़िंदगी और कुछ भी नहीं तेरी मेरी कहानी है
कुछ पाकर खोना है, कुछ खोकर पाना है
जीवन का मतलब तो, आना और जाना है
दो पल के जीवन से, इक उम्र चुरानी है
तू धार है नदिया की, मैं तेरा किनारा हूँ
तू मेरा सहारा है, मैं तेरा सहारा हूँ
आंखों में समंदर है, आशाओं का पानी है


2.
मैं ना भूलूंगा, मैं ना भूलूंगी
इन रस्मों को, इन कसमों को
इन रिश्ते नातों को
चलो जग को भूले, ख़यालों में झूले 
बहारों में डोले, सितारों को छू ले 
आ तेरी मैं मांग सवारूं, तू दुल्हन बन जा 
माँग से जो दुल्हन का रिश्ता, मैं ना भूलूंगी
समय की धारा में, उमर बह जानी है
जो घड़ी जी लेंगे, वही रह जानी है
मैं बन जाऊँ साँस आखिरी, तू जीवन बन जा
जीवन से सांसों का रिश्ता, मैं ना भूलूंगी


3.
ये गलियां ये चौबारा, यहां आना न दोबारा
अब हम तो भए परदेसी, के तेरा यहां कोई नहीं
ले जा रंग-बिरंगी यादें, हंसने रोने की बुनियादें
मेरे हाथों में भरी-भरी चूड़ियां, मुझे भा गई हरी हरी चूड़ियां
देख मिलती हैं तेरी-मेरी चूड़ियाँ, तेरे जैसी सहेली मेरी चूड़ियां
तूने पीसी वो मेहंदी रंग लाई, मेरी गोरी हथेली रचाई
तेरी आंख क्यों लाडो भर आई, तेरे घर भी बजेगी शहनाई
सावन में बादल से कहना, परदेस में मेरी बहना


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