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जी हां ! होली को लेकर बंटा गांव


बलिया। हिन्दू धर्म में तीज-त्योहार की तिथि को लेकर अक्सर ही अलगाव होता रहा है। इस बार होली त्योहार में ऐसा हुआ, जो पहले नहीं होता था। अबकी होली त्योहार में वैसा ही बंटवारा हुआ, जैसा राजनीति में होता है। एक गांव के आधे भाग में होली का त्योहार शुक्रवार को मनाया गया, जबकि आधा भाग शनिवार को मनाएगा। इसी तरह का उदाहरण कपूरी नारायणपुर में देखने को मिला। गांव दो पार्ट में बंटा हुआ दिखा।

होली को लेकर 18 और 19 मार्च की तिथि को लेकर शंशय था कि आयोजन कब होगा। होलिका दहन 17 और होली 18 मार्च को कैलेंडर के मुताबिक था। जिलाधिकारी ने भी इस तिथि को आयोजन की बात कही थी, पर बाद में जिलाधिकारी ने 19 को भी सार्वजनिक अवकाश घोषित कर पांचांग और परंपरा के मुताबिक होली मनाने की घोषणा कर दी। इलाके में आयोजन तिथि को लेकर भेद हो यह समझ में आता है, पर धार्मिक और राजनीतिक गांव में भेद समझ में नहीं आया। कपूरी नरायनपुर के ब्राह्मण बस्ती में पांचांग मुताबिक गुरुवार रात्रि 12 बजे के बाद होलिका दहन कर शनिवार को होली मनाने की बात तय हुई। युवाओं ने गांव के ही संतोष ओझा के दरवाजे पर होली गीत गाना प्रारंभ किया, ताकि समय पास हो और सुबह में होलिका दहन होगा। वहीं, आधे गांव के युवाओं ने शाम को ही होलिका दहन कर दिया। जिन लोगों ने शाम को होलिका दहन किया, उन्होंने शुक्रवार को होली मनाया और जिन्होंने सुबह में होलिका दहन किया वो शनिवार को होली मनाएंगे। पूरे जिले में वैसे यह समस्या बहुत जगह हुई, लेकिन एक गांव में दो भाग लोगों में चर्चा का विषय रहा। 

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