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मैं लिखूंगी... हर बात लिखूंगी



हर बात लिखूंगी, हर ज़ज्बात लिखूंगी
औरत पर हुआ हर अन्याय लिखूंगी 
मर्दो से ज्यादा औरत ने औरत पर जो जुल्म किये 
वो हर दबी आवाज की सिसकियां लिखूंगी 
मैं लिखूंगी 
मन का आक्रोश से लेकर संयम का हर आयाम लिखूंगी
खुद में समेटी दुनिया का हर ज़ज्बात 
मैं वो नारीशक्ति लिखूंगी
तुम जितना रोकोगे उतना और लिखूंगी
टोकोगे तो और लिखूंगी 
कैद करोगे तो बगावत लिखूंगी
लिख  लिख कर भर दूं ढ़ेरों पन्नें
पढ़ना ज़रूर...
मैं तुम्हारी बेटियों के 
अनकहे ज़ज्बात लिखूंगी


रंजना यादव, बलिया

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