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जीवन एक यात्रा है और मृत्यु विश्राम : त्रिदंडी स्वामी

बलिया। गड़हांचल का बघौना इन दिनों आस्था का केन्द्र बना हुआ है। गंगापुत्र श्रीलक्ष्मीनारायण त्रिदंडी स्वामी जी महाराज के श्रीमुख से चल रहे श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह का समापन गुरुवार को हुआ। इस मौके पर पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। भंडारे से पहले गंगापुत्र त्रिदंडी स्वामी जी महाराज ने भागवत कथा में कहा कि महात्मा वही है जो दुर्जन को भी सज्जन बना दे। डाकू को भी बाल्मिकी बना दे। महात्मा तो पारस मणि के समान होता है, जिसके स्पर्श मात्र से पत्थर भी स्वर्ण बन जाता है। इसलिए निरंतर संतों का संग होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जीवन एक यात्रा है और मृत्यु विश्राम है। मानव को सदैव भगवान का स्मरण करते रहना चाहिए। सनातन धर्म में मृत्यु होने पर रोने का विधान नहीं है। मरने वालों को तीन काम करना चाहिए कथा, ईश्वर का स्मरण और श्रवण। कभी बालक, संत और जल इन तीनों का अपमान नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कथा के क्रम में उदाहरण देते हुए कहा कि पुत्र के पिता को कभी भी दहेज लेना नहीं चाहिए। गांधारी के साथ शकुनी आए और कौरव वंश को विलुप्त कर दिया। कैकई के साथ मंथरा आई और अयोध्या में उथल-पुथल कर दिया। त्रिदंडी स्वामी जी के कथा को सुनने के लिए अंतिम दिन आसपास के गांवों के भी लोग आए थे। जिन्होंने कथा की पूर्णाहुति पर आयोजित भण्डारे का प्रसाद ग्रहण किया।

पौहारी जी ने भक्तों को दिया आशीर्वाद

बघौना में करीब दस वर्ष बाद पौहारी जी महाराज कौशल किशोर दास का आगमन हुआ। गुरूवार को सुबह पौहारी जी महाराज के आगमन पर पूरा गांव जयकारों से गुंजायमान हो गया। पौहारी जी ने गांव में सभी के घरों में जाकर आशीर्वाद दिया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने उनके चरण पखारे।

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