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मेरा दर्द न जानें कोय : निराश है यूपी के प्रेरक और शिक्षा मित्र !

बैरिया, बलिया। विधान सभा चुनाव सिर पर है।सभी राजनैतिक दल अपने को मजबूत करने व ऐन केन प्राकेरण कुर्सी हथियाने के लिए हर तरह का प्रयास करने में लगे है। जाति, धर्म, मन्दिर, मस्जिद, विकास का सब्जबाग दिखाकर आम जन को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिशे हो रही है। झूठे रोजगार के दावे ने बेरोजगारी का मेला लगा दिया है, लेकिन असल मुद्दे पर पक्ष विपक्ष सब मौन ही है।

प्रदेश सरकार सबसे अच्छा कार्य करने का दावा कर रही है। देश व प्रदेश आगे बढ़ेगा और बढ़ रहा है के बीच लोक शिक्षा प्रेरक, वर्षों से प्राथमिक विद्यालय का ताला खोलने वाले शिक्षा मित्र अपने को ठगा महसूस कर रहे है। सरकार ने नई शिक्षा नीति लागू करते समय लोक शिक्षा प्रेरको को सब्जबाग दिया था कि प्रेरक नई उर्जा के साथ कार्य करेंगे। लेकिन ऐसा हुआ नहीं, जबकि प्रेरको का पिछले 40 माह का बकाया मानदेय अभी भी तक नहीं मिला। इसके लिए प्रेरको ने आन्दोलन किया। बहुत ज्ञापन भी दिया।नतीजा शिफर रहा।

वही पिछले लोक सभा चुनाव के दौरान वाराणसी में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भाजपा के ही सरकार में पैदा हुए शिक्षा मित्रों को आश्वस्त किया था कि शिक्षा मित्रो की जिम्मेदारी मेरी। तीन माह के भीतर उनकी समस्या खत्म कर दी जायेगी। ऐसा नहीं हुआ। परिणाम स्वरूप हजारों शिक्षा मित्र अवसादग्रस्त होकर काल के गाल में शमा गये।प्रेरक और शिक्षा मित्र राजनीति के शिकार हो गये। प्रेरक और शिक्षा मित्रों का दोष क्या है, यह कोई नही बता पायेगा। लेकिन शायद समय इस प्रश्न का हल जरूर ढुढेगा। ऐसी परिस्थिति में पुनः शिक्षा मित्रो और प्रेरको पर राजनीतिक हथकण्डा चलाने के लिए सारे दल तैयार है। इस सन्दर्भ में शिक्षा मित्र सगंठन के जिलाध्यक्ष पंकज सिंह ने बताया कि शिक्षा मित्रों ने अपना जीवन ही शिक्षा विभाग को समर्पित कर दिया है। ऐसे में उनसे विश्वासघात करने वालो का भला होने वाला नही।एक एक शिक्षा मित्र की मौत का जबाब समय मांगेगा।


शिवदयाल पांडेय 'मनन'

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