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'भेजे हैं कबूतर तो पैगाम भी लिख देना, एक शाम मोहब्बत की मेरे नाम भी लिख देना'

-गड़हा महोत्सव के मंच पर खूब परवान चढ़ा भोजपुरी कवि सम्मेलन
-भरौली में अखिल भारतीय भोजपुरी कवि सम्मेलन में कवियों ने खूब बटोरी तालियां

बलिया। गड़हांचल के भरौली में गंगा किनारे अखिल भारतीय भोजपुरी विकास सेवा संस्थान से सम्बद्ध गड़हा विकास मंच द्वारा आयोजित भोजपुरी कवि सम्मेलन में रविवार की रात कवियों ने एक ओर जहां बेरोजगारी के दंश को शब्दों में लपेट कर उकेरा, वहीं श्रृंगार रस की कविताओं के जरिए ह्रदय के तार को झंकृत भी किया। मशहूर हास्य कवि डा. अनिल चौबे ने हास्य से खूब गुदगुदाया तो अपने व्यंग के माध्यम से सिस्टम पर करारी चोट भी की।


हास्य कवि डा. अनिल चौबे ने कवि सम्मेलन का संचालन करते हुए स्रोताओं की मांग पर अपनी प्रसिद्ध कविताओं को सुनाया। उन्होंने 'बटन सी आंख बीच चाइनीज नाक तेरी ...' और 'नया-नया टीवी जब खरीदा गया हाथ में रिमोट ले पसर गए बाबूजी...' से सबको हंसने पर मजबूर कर दिया। इसके बाद अनिल चौबे ने 'भाग रे मरदे का घबड़ा के लइका तोर नेता हो जाई, एक दिन देश बेच के खाई...' सुना कर राजनीति पर भी शानदार व्यंग किया। इसके पहले कवि सम्मेलन की शुरुआत डा. सुमन दुबे ने सरस्वती वंदना 'मां शारदे वर दे...' से किया। सरस्वती वंदना के बाद कवि सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत युवा कवि संजीव त्यागी ने किया।
संजीव त्यागी ने भोजपुरी में कविता पाठ किया। उन्होंने 'आईं जा नमन करीं जा फतेह बहादुर शाही के ....।' हास्य कवि बादशाह प्रेमी ने आते ही सबको गुदगुदाया। 'स्वर्ग में सम्मान पाएंगे...' और 'ब्रेक फ़ास्ट के बीचे दुपहरिया के भोजन लंच हो गइल...।' यही नहीं उन्होंने 'बुढियो करिया बार रंगवा के...।' सुनाया तो हंसी के ठहाके फूट पड़े। इसके बाद युवा कवि हेमंत निर्भीक ने देशभक्ति कविताओं के जरिए सबको झकझोरा। निर्भीक ने 'भृकुटि तनी हुई थी आंखों से वो लाल था, नींद कैसे आए जब देश का सवाल था, अब्दुल हमीद गाजीपुर का लाल था...।' सुनाकर कड़ाके की ठंड में गर्मी का एहसास कराया। कवि जयप्रकाश जिद्दी ने 'बिकने वालों की लाइन में तुम भी लग जाओगे...' सुनाकर बेरोजगारी पर करारा प्रहार किया। जयप्रकाश जिद्दी के व्यंगों का फजीहत गहमरी ने बखूबी जवाब दिया। गहमरी ने 'गांधी हमारे होठ पे गोडसे दिल में है, देखना है जोर कितना बाजुए कातिल में है।' इसके बाद उन्होंने 'के के गोहराई जब सभही बा दुःशासन...।' सुनाया तो खूब तालियां बजीं। निजाम बनारसी ने गजल 'रूबरू गर शबाब हो जाए, आईना लाजवाब हो जाए...' से माहौल में रुमानियत ला दिया। 
स्थानीय कवियत्री ज्योति राय ज्वाला ने 'गद्दारों की बातें सुन ज्योति ज्वाला बन जाती है... से एक बार बढ़ती ठंड को धता बताया। हास्य कवि डंडा बनारसी ने ' आज मैं दारू पियूंगा यहां कहीं मधुशाला है...' से अपनी शुरुआत की। इसके बाद अपनी चर्चित कविता 'मैंने जा के विवाह कर लिया बिहार में...' सुनाया तो जन्मकर तालियां बजीं। रात के मध्य में आईं डा. सुमन दुबे ने 'आगाज किया है तो अंजाम भी लिख देना, भेजे हैं कबूतर तो पैगाम भी लिख देना, एक शाम मोहब्बत की मेरे नाम भी लिख देना....' से सर्द मौसम में गर्माहट घोल दिया। सुमन दुबे ने भोजपुरी की कविता 'बगिया में कोयलिया बोले, पिजड़ा में सुगनवा बोले, सेजिया पे आधी-आधी रात कंगनवा बोले...' और मति जईह हो सांवरिया आंख फेर के...' से सबका दिल जीत लिया। ओज के कवि भूषण त्यागी ने 'आलोक नहीं मरने वाला...' और 'सरहदों पर टहल रहे हैं तेरी खुशी के लिए, तपती राहों पे तेरी खुशी के लिए... देश की आन बान जिंदा रहे इसके लिए बर्फ के घर में गल रहे हैं तेरी खुशी के लिए...' सुनाकर रात के अंतिम पहर में देशभक्ति का जोश भर दिया। भूषण त्यागी ने भगत सिंह की चिट्ठी कविता के रूप में 'सोने सा चमकते हिंदुस्तान चाहिए...' पढ़ी तो सदन तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। संचालन मशहूर हास्य कवि डा. अनिल चौबे ने किया।


राज्य सरकार के कैलेंडर में शामिल होगा गड़हा महोत्सव : उपेन्द्र 
कवि सम्मेलन का उद्घाटन करने के बाद मंत्री उपेन्द्र तिवारी ने कहा कि गड़हा महोत्सव का मंच दुनिया में प्रसिद्धि हासिल कर चुका है। भोजपुरी की समृद्धि के लिए हर सम्भव प्रयास का संकल्प दोहराते हुए मंत्री ने कहा कि इस मंच द्वारा किए जाने वाले आयोजन को राज्य सरकार के सांस्कृतिक कार्यक्रमों के कैलेंडर में डलवाने का प्रयास किया जाएगा। कहा कि भरौली में अंतरराज्यीय बस अड्डा के लिए प्रयास किया जाएगा। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता पंकज भारद्वाज ने किया। कवि सम्मेलन के संयोजक भोजपुरी गायक गोपाल राय ने सभी कवियों का अंग वस्त्र और माला पहनाकर स्वागत किया। गड़हा विकास मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रमणि राय ने आभार जताया। इस अवसर पर बिजेंद्र राय, सुशील राय, रमेश यादव, रियाजुद्दीन राजू, हरेराम राय आदि ने भूमिका निभायी।

पंकज राय

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