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बलिया में यातायात माह बना मौत बहुतायात माह, देखें 10 दिन का आंकड़ा


बलिया। वर्ष के प्रत्येक नवम्बर माह में चलने वाला यातायात माह इस बार सबसे मनहूस गया। पुलिस प्रशासन द्वारा जागरूकता का हर जतन के बावजूद सड़क हादसों में कमी नहीं आयी। आकड़ों पर गौर किया जाए तो सड़क हादसों में सबसे अधिक मौत इसी नवम्बर माह में ही हुई।यदि चोटिल-चुटहल खबरों को छोड़ भी दे तो जनपद के अलग-अलग थानाक्षेत्रो में इधर के 10 दिनों में आधा दर्जन से अधिक लोग असमय काल के गाल में समा गए। इन घटनाओं का मूल वजह खराब सड़कों पर अप्रशिक्षित वाहन चालकों द्वारा अनियंत्रित वाहन चालन ही है, जो यातायात विभाग इनके स्पीड पर नकेल कसने में शायद असमर्थ है। शायद यही कारण है कि यातायात माह केवल कागजों और इश्तिहारों तक ही सिमट कर रह गया।

नवम्बर माह की कुछ प्रमुख सड़क दुर्घटना

-27 नवम्बर को दुबहड़ थानक्षेत्र के उग्रसेन चट्टी पर अज्ञात वाहन द्वारा मोहन चौधरी (60) की मौत।

-24 नवम्बर को रसड़ा कोतवाली अंतर्गत सोनपुरवा में ट्रैक्टर से दबकर एक लड़की संध्या की मौत।

-22 नवम्बर को रसड़ा कोतवाली क्षेत्र के ही नदौली के पास ट्रक की चपेट में आने से सुनील चौहान (32) की मौत। इसके अलावा 20 नवम्बर को इसी कोतवाली क्षेत्र के अमहर चट्टी पर बाइक सवार संजय राजभर (28) की मौत। इसी दिन फेफना थाना क्षेत्र के पिपरिया यादव बस्ती के समीप कार की टक्कर से कृतन चौहान (16) की मौत हो गई।

-19 नवम्बर को बैरिया थाना क्षेत्र के सोनबरसा पैट्रोल पम्प के सामने अज्ञात वाहन द्वारा इब्राहिमाबाद निवासी गीता देवी (55) की कुचलकर मौत। नवम्बर 18 को दुबहड़ थानाक्षेत्र के शिवपुर (नई बस्ती) निवासी दिहु यादव (60) को अज्ञात वाहन ने कुचला, मौके पर मौत।

-18 नवम्बर को दुबे छपरा ढाले के समीप ट्रैक्टर से कुचलकर बलिया शहर के परमंदापुर निवासी करीना खातून (65) की मौत हो गई।

उपरोक्त मौते तो अभी बानगी भर है, लेकिन इसकी फेहरिस्त लम्बी है। सवाल यह है कि आखिर इन मौतों के प्रति प्रशासन कब तक सजग होगा? माना कि यातायात विभाग हर एक वाहन का एक्सीलेटर अपने कब्जे में नही कर सकता, लेकिन अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए कड़ाई से चालान और वाहन सीज कर ऐसे वाहन चालको पर शिकंजा अवश्य कस सकता है, जो बिना ड्राइविंग लाइसेंस के बाइक और अन्य वाहन द्वारा हवा से बाते करते है।

ओवरलोडिंग वाहन पर भी हो कार्रवाई

मुख्यमार्ग पर ओवरलोड वाहन भी सड़क हादसों के कम जिम्मेदार नही है। सम्भागीय परिवहन विभाग और ओवरलोड वाहन की केमेस्ट्री से नितदिन सड़क हादसों में बढोत्तरी तो हो ही रही है, साथ ही साथ मानको के विपरीत ये ओवरलोड वाहन सड़क को भी क्षतिग्रस्त करते है।

रवीन्द्र तिवारी

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1 Comments

  1. दुर्घटना का सबसे बड़ा कारण बलिया की सड़कें है जो कई वर्षों से गढ्ढे में तब्दील हो गया है

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