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बलिया : चिरकाल तक प्रेरणा देता रहेगा ऋषितुल्य प्रो. जमुना राय का जीवन


बलिया। प्रो. जमुना राय स्मृति समिति एवं राष्ट्रीय सद्भावना मिशन बलिया के संयुक्त तत्वावधान में काशीपुर स्थित नगर कार्यालय में शुक्रवार को 'शिक्षक एवं शिक्षार्थी' विषयक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। उनके तैल चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए वक्ताओं ने न सिर्फ उनके व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डाला, बल्कि उन्हें बहुज्ञ और बहुआयामी व्यक्तित्व का धनी बताया।

डॉ. अजय कुमार मिश्र ने कहा कि प्रो. जमुना राय की प्रारम्भिक शिक्षा गंवई परिवेश में हुई थी। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से भूगोल विषय में परास्नातक एवं हिमांचल प्रदेश विश्वविद्यालय से एमए की परीक्षा उत्तीर्ण कर सतीश चन्द्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बलिया के प्रशिक्षण विभाग में अध्यापन कार्य करते हुए अवकाश ग्रहण किये थे। शिक्षार्थी हित उनकी पहली चाहत थी। ये जितने बड़े शिक्षक थे, उतना ही बड़ा था विसंगतियों से भरा उनका जीवन।


संचालन कर रहे प्रो. जय प्रकाश पाण्डेय ने रेखांकित किया कि वे सहज शिक्षक और शिक्षाविद थे। आचार्य हीरालाल राय ने उन्हें सादा जीवन, उच्च विचार का प्रतीत बताया। उनका ऋषितुल्य जीवन चिरकाल तक प्रेरणा देता रहेगा। अध्यक्षीय सम्बोधन में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. जनार्दन राय ने शैक्षिक मर्यादा और गुरु-शिष्य संबंधों की ओर संकेत करते हुए शिक्षा की दुर्दशा का जिक्र किया। कहा कि जमुना राय का जीवन कर्मवाची शब्द के रूप में याद किया जाता रहेगा। वे बहुज्ञ और बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे।

'यथार्थ की पथरीली जमीं से जुड़े प्रो. जमुना राय का जीवन प्रकाश स्तम्भ की तरह रहा है, जिसकी ज्योति कभी फीकी पड़ने वाली नहीं है। वाकई प्रो. राय मूल्यों के अधिष्ठान थे। व्यक्ति के रूप में अप्रतिम और शिष्टाचार के धनी प्रो. राय के जीवन में कोई ग्रंथि नहीं थी। वस्तुतः वे समर्पित शिक्षक और शिक्षाविद् थे। इस अवसर पर पं. अक्षयवर नाथ ओझा, अशोक कुमार पाण्डेय, मदन पाण्डेय, राघवेन्द्र मिश्र, शिववचन सिंह, सत्य प्रकाश पाण्डेय 'धनजी' आदि ने अपने विचार व्यक्त किये। नीतीश शेखर ने उपस्थितों के प्रति आभार प्रकट किया। 

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