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बलिया में हवाई सर्वेक्षण कर मुख्यमंत्री ने देखा बाढ़ पीड़ितों का दर्द, दिया यह निर्देश


बलिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्नाथ जी ने शुक्रवार को जनपद में हवाई सर्वेक्षण कर बाढ़ की स्थिति को देखा। नागाजी सरस्वती विद्या मंदिर विद्यालय में 50 बाढ़पीड़ितोें के बीच राहत सामग्री का वितरण करते हुए मुख्यमंत्री ने राहत व बचाव कार्य की समीक्षा की। उन्होंने विश्वास जताया कि कोरोना महामारी के साथ-साथ इस बाढ़ की आपदा पर भी नियंत्रण प्राप्त करने में यहां का प्रशासन व राहत कार्य से जुड़े लोग सफल होंगे। 

कहा कि यह सुनिश्चित कराया जाए कि नदी की धारा के बीच छोटी या मझोली नाव को नहीं ले जाया जाए। वहां आवागमन के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ या पीएसी की स्टीमर या बड़ी नाव का प्रयोग हो। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हों। खासतौर पर राहत शिविरों में महिला आरक्षियों की तैनाती अनिवार्य रूप से हों। बाढ़ प्रभावित गांवों में जिन नोडल अधिकारियों की तैनाती की गयी है, वे बाढ़ निगरानी समिति के साथ समन्वय बनाकर हर पीड़ित को राहत पहुंचाएं। कटान की समस्या जहां हो, वहां सिंचाई विभाग तत्परता से काम कराकर कटान की समस्या का समाधान कराएं। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि तिरपाल जरूरतमंदों में वितरित किया जाए। इसकी कमी नहीं होनी चाहिए। राहत सामग्री की आपूर्ति भी बढ़ाने के निर्देश दिए। विद्युत विभाग को निर्देश दिए कि जहां बिजली काट दी गयी है, वहां जनरेटर, बैट्री आदि के माध्यम से प्रकाश व्यवस्था व मोबाइल चार्ज की व्यवस्था सुनिश्चित कराई जाए। कहा कि राहत सामग्री वितरण में जनप्रतिनिधियों का भी सहयोग लिया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि कंट्रोल रूप का संचालन ठीक ढ़ंग से होता रहे। वहां आने वाली सूचना पर तत्काल रिस्पांस दिया जाए। 

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पेट्रोलिंग हमेशा होती रहे, ताकि चोरी की शिकायत नहीं मिले। उन्होंने कहा कि फसल क्षति सर्वेक्षण कराकर हर किसान को मुआवजा दिलाना सुनिश्चित किया जाए। बैठक में राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार उपेंद्र तिवारी, राज्य मंत्री आनन्द स्वरूप शुक्ल, सांसद सलेमपुर रविन्द्र कुशवाहा, राज्यसभा सांसद सकलदीप राजभर, विधायक बैरिया सुरेंद्र सिंह, विधायक सिकंदरपुर संजय यादव, मण्डलायुक्त विजय विश्वास पंत, डीआईजी अखिलेश कुमार, जिलाधिकारी अदिति सिंह, एसपी राजकरन नैय्यर सहित अन्य अधिकारी थे।

34 गांव की 141450 की आबादी बाढ़ से प्रभावित

बलिया। दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत व बचाव कार्य में प्रशासन मुस्तैदी से जुटा हुआ है। बलिया में गंगा, सरयू, टोंस नदी के कारण बाढ़ की स्थिति पैदा हुई है। बाढ़ की चपेट में यहां 112 राजस्व ग्राम है, लेकिन आबादी के रूप में देखा जाए तो 34 गांव की 141450 की आबादी बाढ़ से प्रभावित है। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पीएसी की जल पुलिस एवं लोकल गोताखोर व नाविकों के माध्यम से सुरक्षित आवागमन व राहत बचाव कार्य सुनिश्चित कराया जा रहा है। केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजनान्तर्गत निःशुल्क खाद्यान्न वितरण एवं राज्य सरकार की तरफ से प्रत्येक जनपद में पर्याप्त मात्रा में राहत सामग्री उपलब्ध कराकर वितरित की जा रही है। 

कहा कि पानी से घिरे या इधर-उधर रह रहे बाढ़ पीड़ितों को सुरक्षित स्थल पर राहत शिविरों में पहुंचाने के साथ उनको फूड पैकेट, सामुदायिक किचन के माध्यम से भोजन एवं शुद्ध पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित कराया जा रहा है। पशुओं का टीकाकरण एवं उनको चारा के लिए युद्धस्तर पर भूसा वितरण के भी निर्देश दिए गये है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना महामारी पर नियंत्रण प्राप्त करने में बलिया में बेहतर काम हुआ। अब यहां एक भी कोरोना के केस नहीं है। आक्सीजन की आपूर्ति में आत्मनिर्भरता का प्रयास सराहनीय है। फेफना में बन रहा 100 बेड का आधुनिक सुविधाओं सहित सीएचसी व 10 बेड के पीआईसीयू वार्ड के लिए जिला प्रशासन की प्रशंसा की। वैक्सीनेशन के कार्यक्रम को तेजी से बढ़ाने और सभी सम्बन्धित को इससे जोड़ने की कार्यवाही लगातार जारी रहे।

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