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श्रावण मास में ग्रहों को ऐसे करें शांत, शादी-विवाह में आ रही बाधाएं भी होगी दूर


अगर कुंडली में सूर्य दोष है या आप सूर्य को प्रबल बनाना चाहते हैं तो शिवलिंग पर अर्क पुष्‍प एवं बिल्‍व पत्र चढ़ाएं।
कुंडली से चंद्र दोष को खत्‍म करने के लिए दूध से शिवलिंग का अभिषेक करें साथ ही सफेद रंग के फूल भी चढ़ाएं।
मंगल दोष के कारण जातक गुस्‍सैल और आक्रामक बन जाता है। इस दोष से मुक्‍ति पाने के लिए गुड़ मिले जल या गिलोय के रस से शिव का अभिषेक करें। रक्‍तवर्ण के पुष्‍प चढ़ाएं।
बुध अगर कुंडली में कमज़ोर बैठा है और इस कारण आपको अनके समस्‍याओं का सामना करना पड़ रहा है तो इससे बचने के लिए विद्यापरा के रस से शिव का अभिषेक करें। बिल्‍वपत्र चढ़ाएं।
बृहस्‍पति के दोष को कम करने के लिए हरिद्रा मिलाकर दूध से शिव का अभिषेक करें। शिवलिंग पर फूल चढ़ाएं।
शुक्र से संबंधित बाधाओं को दूर करने के लिए पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक करें। सफेद रंग के फूल अर्पित करें।
शनि दोष से मुक्‍ति पाना बहुत जरूरी होता है वरना शनि के प्रभाव में जीवन कष्‍टदायी बन जाता है। शनि दोष को खत्‍म करने के लिए गन्‍ने के रस से शिवलिंग का अभिषेक करें। नीले रंग के फूल चढ़ाएं।
दो छाया ग्रह राहु और केतु की शांति के लिए भांग मिले हुए जल या दूध से शिव का अभिषेक करें। धतूरा अर्पित करें। दुर्वा और कुश से भी अभिषेक अवश्य करें ,आर्थिक लाभ के लिए चढाएं गन्ने का रस और शत्रु को परास्‍त करने के लिए सरसों का तेल अर्पित करें।

विवाह में बाधा दूर करने के उपाय

विवाह विलंब : कभी कभी कुछ अशुभ ग्रहों के प्रभाव के कारण कन्या के विवाह में विलंब हो जाता है तो इन प्रयोगों या उपायों के करने से विवाह में आ रही बाधाएं दूर हो जाती हैं तथा शीघ्र विवाह होता है।
यदि कन्या के विवाह में  देरी हो रही हो तो मां कात्यायनी देवी की पूजा करनी चाहिए तथा एक माला कात्यायनी मंत्र का जप करना चाहिए।
मंत्र : कात्यायनी महामाये महायोगिनीन्याधीश्वरि नंद गोपसुतं देवि पन्ति में कुरु ने नमः ।।
शीघ्र विवाह हेतु ९ मंगलवार का व्रत रखें तथा प्रत्येक मंगलवार देवी मंदिर जाकर लाल पुष्प अर्पित करें एवं अंतिम मंगलवार को नौ कन्याओं को भोजन करवाएं तथा उन्हें लाल वस्त्र, मेंहदी , दक्षिणा आदि देवे एवं आशिर्वाद प्राप्त करें प्राप्त करें शीघ्र ही  फल की प्राप्ति होगी।

विवाह बाधा निवारक मंत्र
कत्यायनी महामाये महायोगिनीन्याधीश्वरि नंद गोपसुतं देवि पन्ति में कुरु ने नमः।।
अगर कन्या के विवाह में देरी हो रही हो तो मां कत्यायनी के इस मंत्र का जाप प्रतिदिन एक माला करना चाहिए इससे विवाह में आ रही समस्त बाधाएं समाप्त हो जाती है।

मंत्र
पत्नी मनोरमा देहि मनोवृतानुसारिणीम् ।  तारिणी दुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्ववाम् ।।
यह मंत्र युवाओं के लिए है जिनके विवाह में विलंब हो रहा हो। इस मंत्र का रोजाना ११ बार जाप करने से उत्तम विवाह होता है तथा जैसी कामना हो वैसी वधु की प्राप्त होती है।

मंत्र :
ॐ गं  गणपतयै नमः
सबसे पहले बुधवार के दिन गणेश जी की  एक छोटी पीतल की प्रतिमा लेकर आएं। उसको ताँबे की थाली में रखकर पंचामृत से स्नान कराकर विधिपूर्वक उसका पूजन करें। उसके उपरांत मंत्र का २१ बार जाप करें तथा पंचामृत को पीपल के पेड़ में चढ़ा दे। विवाह अतिशीघ्र होगा। विवाह में आ रही बाधाएं समाप्त होगी।
जीवन को सुचारु रुप से चलाने के लिए यह जरूरी है कि विवाह समय पर हो, पर कभी-कभी कुंडली में ऐसे योग बनते हैं जिनके कारण स्त्री या पुरुष विवाह की खुशियों से वंचित रह जाते हैं। यह रूकावट बाहरी वजह से भी आती है। आज हम आपको कुछ ऐसे ही अचूक उपाय बताएंगे, जिसको  करने से कन्या एवं वर दोनों को ही निश्चित रूप से मनवांछित फल प्राप्त होगा और शीघ्र विवाह होगा।

यदि कुंडली में सातवें घर का स्वामी सप्तमांश कुंडली में किसी नीच ग्रह के साथ अशुभ भाव में बैठा हो, तब विवाह नहीं हो पाता है।
यदि श्रवण नक्षत्र जन्म समय पर हो तथा कुंडली में कहीं भी शनि और मंगल का योग हो तो शादी तय होकर टूट जाती है।
जन्म नक्षत्र के सातवें, बारहवें, सत्ताईसवें, सत्रहवें, बाईसवें नक्षत्र में सूर्य स्थित हो तो विवाह तय होकर भी टूट जाता है।
मांगलिक होने के कारण भी विवाह में बाधाएं आ जाती हैं तथा शीघ्र विवाह नहीं हो पाता।
वर या कन्या के ग्रह अनुकूल नहीं होने के कारण विवाह में अत्यंत देरी होती है तथा बाधाएं उत्पन्न होती हैं।
शादी में रुकावट छुटकारा पाने के टोटके
यदि लड़की की शादी में देरी हो रही है। यह बाधाएं आ रही है। इसके निवारण के लिये  भगवान शिव की उपासना करनी चाहिए तथा मंदिर जाकर शिवलिंग के समक्ष “ॐ श्री वर प्रदाय श्री नमः। इस मंत्र का पांच माला जाप करना चाहिए तथा पांच नारियल  शिवलिंग पर अर्पित करना चाहिए इस उपाय से विवाह शीघ्र होता है।
उत्तम विवाह हेतु स्त्री तथा पुरुष दोनो को ही दुर्गा सप्तशती से लेकर आर्गला स्तोत्रम्  तक  पाठ नियमित करना चाहिए।
यदि आप वर या कन्या को देखने जा रहे हैं तो घर से निकलते समय गुड़ का सेवन करके निकलना चाहिए, इससे कार्य पूर्ण होता है।
भगवान श्रीगणेश की विधि पूर्वक पूजा करके पीले रंग की मिठाई का भोग लगाना चाहिए। इससे विवाह का योग बनता है।
यदि कन्या का विवाह शीघ्र नहीं हो रहा हो तो उसको अपनी तकिया के नीचे हल्दी की गांठ को पीले रंग के वस्त्र में लपेट कर रखनी चाहिए, जिससे विवाह में आसानी होती है। विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।
यदि विवाह में बाधाएं उत्पन्न हो रही है तो 13 दिन पीपल की जड़ में जल को अर्पित करना चाहिए, जिससे शादी में आ रही रुकावट दूर हो जाती है।
यदि शीघ्र विवाह नहीं हो रहा हो तो प्रत्येक गुरुवार को स्नान करते समय जल में एक चुटकी हल्दी डालकर स्नान करना चाहिए।
यदि विवाह में बाधा उत्पन्न हो रही हो तो प्रत्येक गुरुवार को आटे के दो पेड़े बनाकर उसमें थोड़ी हल्दी लगाकर गुड़ तथा चने की गीली दाल के साथ गाय को खिलाना चाहिए। इससे विवाह में उत्पन्न हो रही बाधाएं समाप्त हो जाती है।
यदि आपके विवाह के विलंब का कारण राहु हो तो शनिवार के दिन बहते हुए जल में एक नारियल को प्रवाहित करना चाहिए। इससे राहु का प्रभाव कम होता है तथा शीघ्र विवाह का योग बनता है

मांगलिक वर–वधु हेतु उपाय

यदि आप मांगलिक हैं तथा विवाह में बाधाएं आ रही है तो हर मंगलवार को सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण कर चंडिका स्त्रोत का पाठ करना चाहिए। शीघ्र विवाह होता है।
यदि आप मांगलिक है तो प्रत्येक शनिवार को सुंदरकांड का पाठ नियमित करना चाहिए। ऐसा करने से विवाह का योग शीघ्र बनता है ।
मांगलिक लड़के या लड़की को अपने कमरे के दरवाजे पर गुलाबी या लाल रंग का गुलाल रखना चाहिए। ऐसा करने से विवाह का योग बनता है।
मंगलवार को हनुमान मंदिर जाकर हनुमान जी को सिंदूर लगाएं तथा देसी घी का दीपक जलाना चाहिए। इससे विवाह शीघ्र होता है।
यदि मांगलिक होने के कारण कन्या के विवाह में बाधायें उत्पन्न हो रही हो तो प्रत्येक मंगलवार को श्री मंगल चंडिका स्त्रोत का पाठ करना चाहिए तथा लाल मूंगे की माला से ॐ श्री क्ली सूर्य पूज्य देवी मंगल चण्डिके  हूँ फट् स्वाहः मंत्र का जाप करना चाहिए।

बिल्वपत्र कैसे चढ़ाय यह जानना बेहद जरूरी है, क्योंकि बिल्वपत्र के अर्पित करने से लक्ष्मी की कृपा और शिव बहुत जल्द प्रसन्न होते हैं।

बिल्वपत्र भोले नाथ पर सदैव उल्टा रखकर अर्पित करें।
बिल्वपत्र में चक्र एंव वज्र नहीं होने चाहिए। कीड़ो द्वारा बनायें हुये सफेद चिन्हों को चक्र कहते है और डंठल के मोटे भाग को वज्र कहते है।
बिल्वपत्र कटे या फटे न हो। ये तीन से लेकर 11 दलों तक प्राप्त होते है। रूद्र के 11 अवतार है, इसलिए 11 दलों वाले बिल्वपत्र चढ़ायें जाये तो महादेव ज्यादा प्रसन्न होंगे।
कुछ विशेष तिथि‍यों पर बि‍ल्वपत्र को तोड़ना वर्जित होता है। चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, द्वादशी, चतुर्दशी, अमावस्या, पूर्णिमा, संक्रांति पर बिल्वपत्र को नहीं तोड़ना चाहिए।
सोमवार के दिन बिल्वपत्र को नहीं तोड़ना चाहिए, इसमें शि‍वजी का वास माना जाता है। इसके अलावा प्रतिदिन दोपहर के बाद भी बिल्वपत्र नहीं तोड़ना चाहिए। 
बिल्वपत्र चढ़ाने से तीन जन्मों तक पाप नष्ट हो जाते है।
शिव के साथ पार्वती जी पूजा अवश्य करें तभी पूर्ण फल मिलेगा।
शिवपुराण के अनुसार घर में बिल्व वृक्ष लगाने से पूरा कुटुम्ब विभिन्न प्रकार के पापों के प्रभाव से मुक्त हो जाता है। जिस स्थान पर बिल्ववृक्ष होता है उसे काशी तीर्थ के समान पूजनीय और पवित्र माना गया है। ऐसे स्थान पर साधना अराधना करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।

पूजन करते वक्त रूद्राक्ष की माला अवश्य धारण करें।
भस्म से तीन तिरछी लकीरों वाला तिलक लगायें।शिवलिंग पर चढ़ाया हुआ प्रसाद ग्रहण नहीं करना चाहिए।
शिवलिंग की आधी परिक्रमा ही करें।
शिव जी पर केंवड़ा व चम्पा के फूल कदापि न चढ़ायें।

ज्योतिष सेवा केन्द्र
ज्योतिषाचार्य पंडित अतुल शास्त्री
09594318403/09820819501
email.panditatulshastri@gmail.com
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