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पुराने संगीत ही नहीं, उपकरण से भी प्यार है इस शख्स को ; इनके घर जैसा म्यूजियम भी नहीं


सहारनपुर। यूं तो जिंदगी में हर किसी को किसी न किसी प्रकार का शौक होता है। चाहे यह शौक गायन का हो, वादन का या फिर कुछ और ! लेकिन जमील को यदि पुराने गीत संगीत से प्यार है तो पुराने संगीत साधन से इश्क और बेपनाह मुहब्बत है। अपने घर में ही जमील पुराने संगीत साधनों का म्यूजियम जैसे बना रखे है। इनके गृह म्यूजियम में यदि आधुनिक एलईडी, एलसीडी है तो उसी के बगल में प्राचीन संगीत साधन का उपकरण ग्रामोफोन भी है।



जनपद के जिला मुख्यालय से महज चार किलोमीटर मल्हीपुर रोड पर स्थित नयागांव निवासी जमील का संगीत के प्रति लगाव बचपन से ही था। जीवन के अर्धशतक तक पहुंचे जमील आज भी पुराने गीतों को गुनगुनाते रहते है। जमील के म्यूजिकल संग्रहालय में प्राचीन से प्राचीन रेडियो, ट्रांजिस्टर, ग्रामोफोन, टेलीफोन उपकरण इत्यादि मौजूद है। 



ताज्जुब तो तब होता है जब ये सभी उपकरण "फिट एन्ड फाइन" की अवस्था में है। पुराने टेलीफोन रिसीवर, लैम्प, लालटेन सहित पीतल निर्मित स्टोव, हुक्का इत्यादि इनके संग्रहालय की शोभा बढ़ाते है।जमील का शौख इतना भर ही नहीं, बल्कि बागवानी करना भी बहुत पसंद है। इनके घर के पास की फुलवारी में एक से एक फल-फूल वाले पेड़ पौधे है।



रवीन्द्र तिवारी 

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