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बलिया : शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, इस बरस भी लगा ; लेकिन...


बैरिया, बलिया। 18 अगस्त 1942 के शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित करने के लिए मंगलवार को शहीद स्मारक पर फूलमाला चढ़ाकर अमर शहीदों को नमन किया गया। परम्परा के अनुसार सर्वप्रथम बैरिया के एसएचओ राजीव कुमार मिश्र ने वैदिक मंत्रोचार के साथ पूजन अर्चन कर शहीद स्मारक पर फूलों का चादर चढ़ाकर उत्तर प्रदेश पुलिस की तरफ से शहीदों को नमन किया। उसके बाद राजनैतिक दलों, सेनानी संगठन सहित विभिन्न संगठन के लोगों ने श्रद्धासुमन अर्पित किया। 


सांसद वीरेन्द्र सिंह मस्त, पूर्व सांसद भरत सिंह, समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता सूर्यभान सिंह, इन्टक के जिलाध्यक्ष विनोद सिंह, पूर्व विधायक जयप्रकाश अंचल, पूर्व विधायक सुभाष यादव, भाजपा जिलाध्यक्ष जयप्रकाश साहू, नगर पंचायत बैरिया अध्यक्ष शांति देवी, अध्यक्ष प्रतिनिधि शिवकुमार वर्मा मन्टन समेत तमाम दलों व संगठनों के नेताओं ने श्रद्धासुमन अर्पित किया। नागाजी सरस्वती विद्यामन्दिर भोजापुर प्रधानाचार्य डा राजेन्द्र पाण्डेय की टीम व द्वाबा संस्कृत प्रचार समिति महाविद्यालय बैरिया के प्राचार्य डा अरविन्द राय की टीम ने श्रद्धा का फूल स्मारक पर चढ़ाया। 


टूटी 63 वर्षों की परम्परा, लेकिन...
सेनानियों व सेनानी आश्रितों के संगठन के सदस्यों के बैरिया शहीद स्मारक पर पहुंचने पर बैरिया तहसील प्रशासन द्वारा प्रोटोकॉल के तहत उपजिलाधिकारी व क्षेत्राधिकारी बैरिया चिरैया मोड़ तिराहा से स्वागत कर उन्हें शहीद स्मारक तक ले जाते थे। वहां सेनानी संगठन के लोग श्रद्धांजलि अर्पित कर लेते थे, तब उन्हें बैरिया तहसील में ले जाकर जलपान व सम्मान के बाद चिरैया मोड़ तक छोड़कर बांसडीह के लिए विदा कर देते रहे है। लेकिन इस साल ऐसा कुछ नहीं हुआ। अलबत्ता बैरिया नगर पंचायत के ईओ आशुतोष ओझा सेनानी संगठन के लोगो का स्वागत कर उन्हें अंगवस्त्रम से सम्मानित किये। सेनानी संगठन की अगवानी और सम्मान नहीं होने के संदर्भ में तहसीलदार पंडित शिवसागर दुबे ने कहा कि जानकारी न होने के कारण यह चूक हुई है। बाद में जानकारी हुई तो सेनानी संगठन के लोगों को आग्रह कर तहसील में बुलाया गया। उन्हें सम्म्मनित किया गया। भूल के लिए माफी मांग गयी। इसके बाद उन्हें वापस भेजा गया।


पहले मंच लगता था, सूचना विभाग प्रदर्शनी लगाता था
सेनानी संगठन के अध्यक्ष स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रामविचार पांण्डेय ने श्रद्धासुमन अर्पित करने के बाद कहा कि परम्परायें टूट रही है। पहले यहां मंच लगता था। सूचना विभाग प्रदर्शनी लगाता था, लेकिन अब ऐसा कुछ नहीं है। केवल रस्म अदायगी हो रही है। मधुबनी निवासी पूर्व शिक्षक शम्भूनाथ तिवारी ने कहा पूर्व में सत्ता पक्ष व विपक्ष मंच पर एक साथ इकट्ठा होते थे। हजारों की भीड़ होती थी। सत्ता पक्ष के सामने विपक्ष उनके कमी को बताते थे और सत्ता पक्ष में सुनने की क्षमता होती थी। आज न तो सुनने की क्षमता है और न सर्वदलीय मंच लग रहा है। इस वर्ष आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। आश्रित संगठनों के साथ आये सांस्कृतिक मंडली ने नुक्कड़  नाटिका प्रस्तुत कर आजादी की लड़ाई का दृश्य प्रस्तुत किया। उक्त मौके पर शिवकुमार कौशिकेय, योगेंद्र प्रसाद, पारस नाथ, महेन्द्र सिंह, विजय बहादुर सिंह, महेन्द्र हलवाई आदि उपस्थित रहे।


शिवदयाल पांडेय 'मनन'

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