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छोटी उम्र में बड़ी उड़ान : बलिया के लाल लक्की पांडेय का एमाजॉन, कोबो, गूगल प्ले और प्ले स्टोर पर धमाल


बलिया। हौसले बुलंद और दिल में मंजिल पाने की चाहत हो तो परिस्थिति रास्ता नहीं रोक सकती। जी हां, कुछ इसी तरह की मिसाल पेश की है, जिले के लाल लक्की पांडे ने। महज 17 साल की उम्र में किसान पुत्र लक्की पांडे ने 'सामाजिक कुनीतियों एवं रेप पीड़िताओं' पर किताब लिखकर इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड में नाम भी दर्ज कराया है। आज इनकी किताब एमाजॉन, कोबो, गूगल प्ले व प्ले स्टोर पर भी उपलब्ध है। 


सिकन्दरपुर तहसील क्षेत्र के लौहर (देवकली) निवासी सुजीत पांडेय व श्रीमती रिंकी पांडेय के बड़े पुत्र लक्की पांडेय के रोम-रोम में प्रतिभा है। लेखन में रूची रखने वाले लक्की ने कई कविताएं लिखी है। 12वीं के छात्र लक्की की सोच सामाजिक कुनीतियों और रेप पीड़िताओं पर पड़ी, फिर क्या इन्होंने किताब लिखने की ठान ली। इस बीच, लॉकडाउन ने साथ दिया और इन्होंने अपने मन में उमड़ते-घुमड़ते शब्दों को 'आखिर क्यों ?' शीर्षक रूपी अपनी किताब में समाहित कर दिया। अपनी इस 'आखिर क्यों ?' बुक में इन्होंने दो कंपोजीशन दिया है। इस बीच, ईवीएनसी पब्लिकर्स छत्तीसगढ़ द्वारा आयोजित ऑनलाइन प्रतियोगिता लक्की पांडेय के लिए 'लक्की' साबित हुई। इनकी पुस्तक सेलेक्ट होने के साथ ही पब्लिकर्स ने फोन कर लक्की से अपनी पुस्तक प्रकाशित कराने का सुझाव दिया। पुस्तक प्रकाशित हुई, जिसका आईएसबीएन नम्बर भी मिल गया। इस पुस्तक के बदौलत लक्की पांडेय का नाम इंडिया बुक ऑफ रिकार्ड में भी दर्ज हो चुका है। अपनी सफलता का श्रेय लक्की ने माता-पिता के साथ ही अपने पिता के मित्र अश्वनी शर्मा को दिया। 

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