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बलिया : बेसिक शिक्षा विभाग की हठधर्मिता पर शिक्षक नेता ने जताया कड़ा विरोध


बलिया। विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एशोसिएशन के जिलाध्यक्ष डॉ. घनश्याम चौबे ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बेसिक शिक्षा विभाग की हठधर्मिता पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। डॉ. चौबे ने कहा है कि बेसिक शिक्षा परिषद के हुक्मरान जबरन शिक्षकों को कम्प्यूटर अपरेटर बना देने पर अमादा है। बच्चों को आनलाइन पढाने के साथ ही डाटा फीडिंग का कार्य शिक्षकों के लिए जी का जंजाल बना हुआ है। विभाग द्वारा कम्प्यूटर की ट्रेनिंग दिये बिना ही शिक्षकों से कम्यूटर आपरेटर की तरह प्रेरणा पोर्टल पर सारे कार्य कराये जाने से शिक्षकों में काफी रोष है।एसोसिएशन ऐसे तुगलकी फरमान का विरोध करता है।

कोरोना काल में पूरी तरह डिजिटलाइज्ड हुए विभाग ने संसाधन दिये बिना शिक्षकों से उनके निजी संसाधनों के माध्यम से कार्य कराने शुरू कर दिये, जो अभी भी जारी है। स्कूल बंद होने के कारण ऑनलाइन क्लास चलाकर बच्चों को पढ़ाये जाने तक तो ठीक था, लेकिन इन शिक्षकों से छात्रों के वेरिफिकेशन से लेकर अभिभावकों के खातों की फीडिंग तक का कार्य प्राथमिकता पर कराया जा रहा है। इतना ही नहीं प्रेरणा पोर्टल पर सारे कार्य कराये जाना शिक्षकों के लिए तनाव का कारण बना हुआ है। साथ ही निर्धारित समय पर कार्य पूर्ण न करने पर अध्यापकों पर कार्यवाही करने की बात कही जा रही है। यदि किसी भी शिक्षक पर इसको लेकर कार्यवाही होती है तो एसोसिएशन आंदोलित होने के लिये बाध्य होगा। 

बहुत से ऐसे शिक्षक हैं, जिन्हें संगणक विधा के संचालन की जानकारी नही है। ऐसे में उनके पास निजी पैसों से काम कराने के अलावा दूसरा कोई रास्ता नही है। साइबर कैफे पर भी विभाग के पोर्टल के कभी जाम होने तो कभी बंद होने के कारण कैफे वाले भी शिक्षकों के प्रेरणा पोर्टल पर काम नही करना चाहते। हर काम को समय से समाप्त करने का दावा करने वाले बेसिक शिक्षा विभाग ने करीब तीन वर्ष पूर्व प्रधानाध्यापकों को टेबलेट देने के लिये प्रक्रिया ज़ोर शोर से शुरू की थी, लेकिन समय बीतने के साथ ही यह मामला ठंडे बस्ते डाल दिया गया। समझ में नहीं आ रहा कि बेसिक शिक्षा के आला अधिकारी बिना संसाधन के ही नई-नई योजनाओं को अमली जामा पहनाने का दिवास्वप्न क्यों देख रहे हैं। यह दुर्भाग्य का विषय है कि बेसिक शिक्षा प्रयोगशाला बनकर रह गई है। नित नए प्रयोगों ने शिक्षा व्यवस्था को उनके मूल उद्देश्यों से भटका कर रख दिया है। यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि गैर शैक्षणिक कार्यों का बोझ एवं अनावश्यक सूचनाओं के बोझ ने बेसिक शिक्षा व्यवस्थाओं को दिशाविहीन बना दिया है।

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