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बलिया की बेटी प्रोफेसर अल्पना मिश्र को मिलेगा यह सम्मान, पूर्वांचल में खुशी


बलिया। दसवां सावित्री त्रिपाठी स्मृति सम्मान सुप्रसिद्ध कथाकार प्रो. अल्पना मिश्र को दिया जाएगा। सावित्री त्रिपाठी न्यास के सचिव श्री पीयूष त्रिपाठी ने यह घोषणा की। सम्मान निर्णयक समिति के सदस्य प्रोफेसर काशीनाथ सिंह, प्रोफेसर बलराज पांडेय और प्रोफेसर आशीष त्रिपाठी ने सर्वसम्मति से अल्पना मिश्र का चयन किया है। अब तक 
एकांत श्रीवास्तव, चौथीराम यादव, देवेंद्र, दिनेश कुशवाहा, अवधेश प्रधान, अनुज लुगुन, संजय सिन्हा, अब्दुल बिस्मिल्लाह और राकेश रंजन को इस सम्मान से विभूषित किया जा चुका है। इस वर्ष सम्मानित की जा रहीं अल्पना मिश्र हिंदी की प्रतिष्ठित कथाकार हैं। अल्पना मिश्र मूल रूप से बलिया के ओझाछपरा की रहने वाली है। ये हिंदी के मूर्धन्य साहित्यकार पंडित हज़ारी प्रसाद द्विवेदी की भतीजी है। दिल्ली विश्विद्यालय के हिंदी विभाग में प्रोफेसर अल्पना मिश्र को यह सम्मान 7 जुलाई को मिलेगा। कोविड की विशिष्ट परिस्थिति के कारण 7 जुलाई की शाम 5 बजे से सम्मान समारोह सावित्री त्रिपाठी स्मृति फाउंडेशन के फेसबुक पेज पर लाइव प्रसारित होगा।

अल्पना की अनेक पुस्तकें प्रकाशित 
अल्पना मिश्र ने हिंदी सहित्य में एमए किया है। काशी हिंदू विश्वविद्यालय से शोध उपाधि प्राप्त की है। उनकी अनेक पुस्तकें प्रकाशित हैं। अंधियारे तलछट में चमका, अस्थि फूल (उपन्यास), भीतर का वक्त, छावनी में बेघर, कब्र भी कैद औ जंजीरें भी, स्याही में सुरखाब के पंख, अल्पना मिश्र : चुनी हुई कहानियां, दस प्रतिनिधि कहानियां (कहानी संग्रह), सहस्त्रों विखंडित आईने में आदमकद, स्त्री कथा के पांच स्वर, स्वातन्त्र्योत्तर कविता का काव्य वैशिष्टय (आलोचना), सहोदर: संबंधों की श्रृंखला, कहानी संग्रह (संपादन) उनकी प्रमुख पुस्तकें हैं। 

कई विश्विद्यालयों के पाठ्यक्रम में है अल्पना की कहानियां
अल्पना मिश्र की कई कहानियां, देश के कई प्रतिष्ठित विश्विद्यालयों के पाठ्यक्रम में पढ़ाई जा रही हैं। उनकी कहानियों और उपन्यासों पर विश्विद्यालयों में दर्जन भर से अधिक शोध कार्य हो चुके हैं। उनकी कुछ कहानियों का अनुवाद पंजाबी, बंगला, कन्नड़, मलयालम, अंग्रेजी, जापानी आदि भाषाओं में हो चुका है। उनके चर्चित उपन्यास 'अंधियारे तलछट में चमका' का पंजाबी भाषा में अनुवाद और प्रकाशन हो चुका है। अल्पना मिश्र ने नवम्बर 2018 में जापान की पंद्रह दिवसीय साहित्यिक यात्रा की। जापान यात्रा के दौरान अल्पना मिश्र के साहित्य पर केंद्रित कार्यक्रम आयोजित हुए और वहां के पांच शहरों और विश्वविद्यालयों में अल्पना मिश्र का व्याख्यान और जापानी लेखकों से संवाद आयोजित किया गया। रोहिणी साल्वे द्वारा उनकी कहानियों पर केंद्रित एक आलोचना पुस्तक 'इक्कीसवीं सदी की कहानियां और अल्पना मिश्र का कथा साहित्य' भी प्रकाशित है।

अब तक मिला सम्मान
अल्पना मिश्र को उनके लेखकीय योगदान के लिए अब तक कई पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है, जिनमें शैलेश मटियानी स्मृति कथा सम्मान, परिवेश सम्मान, शक्ति सम्मान, प्रेमचंद स्मृति कथा सम्मान, वनमाली सम्मान, भारतीय भाषा परिषद कोलकाता का राष्ट्रीय रचनाकार सम्मान प्रमुख हैं।

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