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बलिया : कोरोना से बचाव को शिक्षक ने कुछ यूं लगाई 'दरबार' में हाजिरी


ग़ज़ल

सही जातीं नहीं अब ज़िंदगी की सिसकियां मौला
कि अब तो खोल दे तू रहमतों की खिड़कियां मौला

मसानों में लगा है इस क़दर रेला चिताओं का
कि चूल्हा तक जलाने को नहीं हैं लकड़ियां मौला

बचेंगी क्या फ़क़त वीरानियां ही इस मुहल्ले में
उठेंगी और कितनी इस गली से अर्थियां मौला

नदी की रेत में तो हर तरफ़ रूपोश हैं लाशें 
करें आख़िर कहां तरबूज की  हम खेतियां मौला 

उठाकर देख लें... 
फरियाद सबमें एक जैसी है
हज़ारों में भले ही हों हमारी अर्ज़ियां मौला 

'शशी' की गल्तियां तो देख  लेता है वहां से तू 
नहीं दिखतीं तुझे क्यूं मौत की  मनमानियां मौला 
  
शशी प्रेमदेव 'शशी'
बलिया, उत्तर प्रदेश
सम्पर्क सूत्र : 8318761434

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