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कोरोना काल में बलिया के चंदन की उम्मीद भरी सुबह

 


एक सुबह होगी

जब लोगों के कंधों पर ऑक्सीजन सिलेंडर नही दफ्तर का बैग होगा।
गली में एंबुलेंस नहीं स्कूल की वैन होगी।
और भीड़ दवा खानों पर नहीं चाय की दुकानों पर होगी।

एक सुबह होगी

जब पेपर के साथ पापा को काढ़ा नहीं चाय मिलेगी।
दादा जी बाहर निकल के बेखौफ पार्क में गोते लगाएंगे।
और दादी टेरेस पर नहीं मंदिर में जल चढ़ा के आयेंगी।

एक सुबह होगी

जब हाथों में कैरम और लूडो नहीं बैट और बाल होगा।
मैदानों में सन्नाटे नहीं शोर का भार होगा।
शहरों की सारी पाबंदी हटेगी और फिर से त्योहार होगा।

एक सुबह होगी

जब जी भर के सबको गले लगाएंगे।
कड़वी यादों को दफन कर फिर से मुस्कुराएंगे।
और दुनिया को कह देंगे नज़र झुका लो हम वापस आए है। 


चन्दन कुमार, बलिया

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