To Learn Online Click here Your Diksha Education Channel...


>>>

ओह ! बलिया के लिए दुर्भाग्यपूर्ण


जहां इस आपदा में डरकर सभी अपने घरों में दुबके हुए हैं, वहीं अपनी जान जोखिम में डालकर कम संसाधन में काम करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों को पूरा देश सलाम कर रहा है। ऐसे कठिन समय में शनिवार की रात 2-3 बजे बलिया के कोविड हॉस्पिटल फेफना एल-1 में कुछ लोग एक मरीज को लाये, जिसका ऑक्सीजन लेबल 35 के आसपास आ चुका था। डॉक्टर व पूरी टीम ने उसे ऑक्सीजन लगाकर इलाज प्रारम्भ किया मगर उसे बचा नही पाए। तभी अराजक परिजनों ने डॉक्टरों के साथ-साथ अन्य स्टाफ के सभी कर्मचारियों को पीटना प्रारम्भ कर दिया। डॉक्टर से लेकर अन्य कर्मी घायल हैं वहाँ उपस्थित कर्मियों में कोई नही बचा... गुस्ताखी इतनी कि उस अमानवीय परिघटना के बाद पुलिस आने के बावजूद भी उत्पाती लोग डटे रहे। चाहें कोई भी हो यह सब माफ नही किया जा सकता है। हालांकि अब एफआईआर वगैरह हो चुका है। मगर चिंतनीय यह है कि ऐसे माहौल में कोई किस तरह काम कर सकता है। वहां पर कार्यरत भाई विवेक सिंह बता रहे थे कि उपस्थित डॉ अरविंद कुमार, अरुण जायसवाल, विनय सिंह, नन्दलाल यादव आदि पूरी टीम डरी हुई है। कहीं न कहीं लोगों को बचा लेने से जो ऊर्जा उन्हें काम करने को प्रेरित करती थी, वह भी क्षीण हो रही है। शासन प्रसाशन को मुस्तैदी के साथ उनकी पूरी सुरक्षा का बंदोबस्त करना पड़ेगा। नही तो यदि इन लोगों ने हाथ खड़े कर दिए तो हम और हमारा समाज कहीं का नही रहेगा। आज के वक्त में ये कोरोना वारियर्स किसी देवदूत से कम नही है। अटेवा बलिया इस अमानवीय घटना की निंदा करता है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही कि मांग करता है।


समीर कुमार पाण्डेय
संयोजक अटेवा बलिया

Post a Comment

0 Comments