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बलिया : सात फेरा लेने से बची बालिका, ऐसे रूकी शादी


बलिया। कॉलर की सूचना पर एक 14 वर्षीय बालिका परिणय सूत्र बंधन में बंधने से बच गयी। न्याय पीठ बाल कल्याण समिति के न्यायिक सदस्य राजू सिंह को फोन कर एक कॉलर ने बताया कि हमारे बांसडीह कचहरी में एक मां द्वारा अपने 14 वर्ष की बालिका की शादी एक वयस्क लड़के के साथ की जा रही है।तिलक 23 मई और बारात 28 मई को तय की है। यह बाल विवाह रुकवा दीजिए सर। एक नाबालिग बालिका का जीवन बचा लीजिए प्लीज।

न्याय पीठ बाल कल्याण समिति ने त्वरित कार्रवाई करते हुए महिला शक्ति केंद्र के महिला कल्याण अधिकारी पूजा सिंह, वन स्टॉप सेंटर के सेंटर मैनेजर प्रिया सिंह, जिला बाल संरक्षण इकाई बलिया व चाइल्ड लाइन बलिया की संयुक्त टीम बनाकर बांसडीह कोतवाली थाने की फोर्स के साथ महिला के घर भेजी। बालिका की मां को टीम ने बताया कि नाबालिग की शादी करना गैरकानूनी है। टीम को मां ने लिखित रूप से दिया कि मैं अपनी लड़की की शादी 18 वर्ष पूर्ण होने के बाद ही करूंगी। 

शादी को रुकवाने में जिला प्रोबेशन अधिकारी समर बहादुर सरोज न्याय पीठ बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष प्रशांत पांडे, सदस्य अनीता तिवारी का महत्वपूर्ण योगदान रहा। न्याय पीठ बाल कल्याण समिति के न्यायिक सदस्य राजू सिंह ने बताया कि बाल विवाह करना और करवाना गैर जमानती अपराध है। बाल विवाह को मान्यता देने वाले अभिभावक, बराती, विवाह में शामिल लोग, पंडित, नाई, टेंट वाले, बैंड बाजा वाले, हलवाई, फोटोग्राफर सभी को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 की धारा 9 व 10 के तहत 2 साल की सजा और ₹100000 जुर्माने का प्रावधान है।

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