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बलिया : बूढ़ी दादी बोली - जीते जी इन बच्चों को कही नहीं भेजूंगी, फिर...


बैरिया, बलिया। करोना ने बहुत से परिवार से उनकी खुशियां हमेशा के लिए छीन लिया है। जिस परिवार में कल तक किलकारियां गूंजा करती थी, आज उसी घर के बच्चे गुमनाम नजर आ रहे हैं। ऐसे बच्चे व परिवार की पहचान करने का काम चल रहा है। करोना के कारण माता पूनम देवी व पिता संतोष पासवान की मौत के बाद बेटी रूबी (13), काजल (10) व अंकुश (6) की देखरेख उनकी दादी फुलेश्वरी देवी पत्नी स्व. फूलदेव पासवान के कंधे पर आ गई हैं। मदद पहुंचाने के लिए महिला और बाल विकास विभाग की टीम न्याय पीठ बाल कल्याण समिति के सदस्य राजू सिंह के नेतृत्व में महिला शक्ति केंद्र के महिला कल्याण अधिकारी पूजा सिंह, वन स्टॉप सेंटर के सेंटर मैनेजर प्रिया सिंह, जिला बाल संरक्षण इकाई से राजेश खरवार, चाइल्ड लाइन से युसूफ खान और शाहिदा परवीन की संयुक्त टीम ने शनिवार को दलन छपरा पासवान बस्ती (दोकटी) पहुंची। 


दादी को टीम ने बताया कि अगर आप बच्चों की देखभाल नहीं कर सकती हैं तो हमें सुपुर्द कर दीजिए। सरकार द्वारा संचालित बालगृह और बालिका गृह में बच्चे को रहने खाने पढ़ने की नि:शुल्क व्यवस्था सरकार के तरफ से है, जहां आप जब चाहे बच्चों से मिल सकती हैं।


वहीं, परिवार में माता पिता की मृत्यु के बाद ऐसे दो बच्चे को पुनर्वासन के लिए स्पॉन्सरशिप योजना के तहत प्रत्येक माह ₹2000 दिए जाते हैं। दादी ने बच्चों को अपने पास रखने की सहमति जताई।न्यायिक सदस्य राजू सिंह ने कहा कि महिला एवं बाल विकास की योजना स्पॉन्सरशिप से दो बच्चों को जल्द लाभान्वित करने का आश्वासन दिया है। साथ ही ऐसे बच्चों के भरण पोषण को मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में कार्य योजना तैयार हो रही है, जिससे बच्चों को बहुत जल्द लाभ होगा।

शिवदयाल पांडेय 'मनन'

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