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बलिया : जिसका कोई नहीं, उसका पुलिस होती है यारों ; सिपाही आशुतोष सिंह ने किया साबित

अज्ञात शव का अंतिम संस्कार करते सिपाही आशुतोष सिंह

बलिया। पुलिस के प्रति लोगों की सोच अक्सर निगेटिव रहती है, लेकिन उनकी अच्छाई पर कोई ध्यान नही देता। कोरोना काल चल रहा है। सरकार के मंशानुरूप नियमों का पालन कराना पुलिस के जिम्मे है। गंगा घाट से लगायत गंगा नदी के बीच निरीक्षण भी पुलिस कर रही है, ताकि कोई शव का जल प्रवाह न कर सके। वहीं, गंगा नदी के किनारे रविवार की शाम पुलिस की उदारता देख लोगों की जुबां से एक ही आवाज निकली धन्य हो आप। आपकी कर्तव्यनिष्ठा को सैल्यूट। ऐसे में सिपाही आशुतोष सिंह के आत्मबल की जितनी सराहना की जाय, कम होगी। 

                  सिपाही आशुतोष सिंह

शहर कोतवाली क्षेत्र के जापलिनगंज मोहल्ला में शनिवार को एक अज्ञात वृद्ध अचेत अवस्था मेें मिला था। मोहल्ले के लोगों ने जिला अस्पताल में उसे भर्ती कराया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। रविवार को पोस्टमार्टम के बाद ओक्डेनगंज पुलिस चौकी के जवान अंतिम संस्कार के लिए शव को लेकर माल्देपुर गंगा घाट पर पहुंंचे। पुलिस के जवान शव जलाने की तैयारी में थे, तभी डोम कोरोना संक्रमित का शव समझ खिसक गया। इसके बाद सिपाही आशुतोष सिंह ने कदम बढ़ाया। लकड़ी की चिता सजाकर आशुतोष सिंह ने शव को विधि के साथ अंतिम संस्कार किया। सिपाही आशुतोष सिंह की इस उदार प्रवृति की चहुंओर चर्चा हो रही है।  

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