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बलिया : ड्रेजिंग कार्य का सच देख डीएम ने किए अधिकारियों को सचेत, UPPCL के ये अफसर भी थे मौजूद


बलिया। गंगा नदी की बाढ़ एवं कटान से एनएच 31 व गांवों की सुरक्षा को लेकर चल रहे ड्रेजिंग कार्य का सच देखने शनिवार को अचानक जिलाधिकारी अदिति सिंह पहुंच गयीं। गंगा पार पचरुखिया मौजे में नदी की धारा मोड़ने के दूसरे चरण के कार्य की मंद गति पर डीएम ने नाराजगी जताई।यूपीपीसीएल के अधिकारियों की खिंचाई करते हुए डीएम ने निर्देश दिया कि जितना जल्द हो संसाधन बढ़ाकर काम में समय से पहले काम को पूरा कराये। अगर समय से कार्य पूरा नहीं हुआ तो सजा भुगतने के लिए तैयार रहे। यूपीपीसीएल के जनरल मैनेजर टीएन सिंह व प्रोजेक्ट मैनेजर पंकज वर्मा की मौजूदगी में जिलाधिकारी ने साइड इंचार्ज दिलीप कुमार गौर से डीएम ने काफी सवाल-जबाब किए। 

शनिवार को ड्रेजिंग कार्य का जायजा लेने पहुंची डीएम को यूपीपीसीएल के जनरल मैनेजर ने पांडेपुर में किसानों द्वारा डेजिंग कार्य रोकने की बात बताई। इस पर जिलाधिकारी ने कहा कि तत्काल किसानों से बात की जाए। उनकी समस्याओं को सुना जाए। अगर कोई दिक्कत होती है तो एसडीएम बैरिया के साथ मिलकर किसानों की समस्याओं को सुने, ताकि उनका समाधान निकाले। प्रोजेक्ट के जनरल मैनेजर ने बताया कि यह परियोजना करीब ₹200000000 की है। 


करीब 4 किलोमीटर लंबाई व 60 मीटर चौड़ाई तथा गंगा के तलहटी से करीब 4 मीटर गहरा खुदाई करना है। इसमें करीब 50% से अधिक काम हो चुका है। शेष कामों को भी जल्द पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। जिलाधिकारी ने अधिकारियों की बात सुनने के बाद नजदीक से जाकर ड्रेजिंग कार्य की सच्चाई देखी। यूपीपीसीएल के जनरल मैनेजर से साफ शब्दों में कहा कि काम की गुणवत्ता का ख्याल रखा जाय। मानक के अनुरूप तय समय के भीतर कार्य पूर्ण हो। चेतावनी दी कि इस कार्य में लापरवाही बरतने वाले के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। अभी समय है, संसाधन बढ़ाकर 15 जून से पहले ड्रेजिंग का कार्य पूर्ण कर लिया जाए। 


अधिकारियों के व्यवहार से किसान नाराज
काश्तकारों ने ड्रेजिंग कार्य रोका है, लेकिन जिलाधिकारी के आने की सूचना उन्हें नहीं दी गई। इस वजह से किसान अपनी समस्या जिलाधिकारी को नहीं बता सकें। किसान वरुण पांडे, बसंत कुमार पांडे, योगेंद्र पांडे आदि किसानों ने कार्यदाई संस्था पर आरोप लगाया कि यूपीपीसीएल के अधिकारी किसानों की समस्याओं का समाधान करना नहीं चाहते हैं। अगर ऐसा नहीं होता तो जिलाधिकारी के आने की सूचना उन्हें दी गई होती। हम किसानों को अपना दर्द बताने का मौका नहीं दिया गया, जिसका जिम्मेदार यूपीपीसीएल के अधिकारी हैं। यूपीपीसीएल के अधिकारियों को पता था कि डीएम का निरीक्षण होने वाला है, लेकिन हमें सूचना नहीं दी गई। विभाग नहीं चाहता है कि किसानों की समस्याओं को सुलझाया जाए। किसानों ने चेताया कि जब तक हमारी समस्याओं का समाधान नहीं होगा, हम अपने कृषि योग्य जमीन पर ड्रेजिंग कार्य नहीं होने देंगे।

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