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बलिया : सरकार को वॉक ओवर नहीं देने देगा राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ



बलिया। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ बलिया के जिला सयोजक राजेश कुमार सिंह ने कहा कि कोरोना महामारी के भयंकर प्रकोप के मध्य अपनी जान जोखिम में डालकर बेसिक शिक्षकों ने पंचायत निर्वाचन कार्य सफलता पूर्वक सम्पन्न कराया। निर्वाचन आयोग द्वारा प्रशिक्षण से लेकर मतगणना तक कहीं भी कोविड प्रोटोकाल का पालन नहीं कराया गया। इस दौरान संकमित होकर जान गंवाने वाले शिक्षकों को अनुग्रह राशि देने के मुद्दे पर सरकार अपने ही वादे से पीछे हट रही है, जबकि उच्च न्यायालय द्वारा भी एक करोड़ अनुग्रह राशि की संस्तुति की गयी है। सरकार खुद 50 लाख देने की बात कर रही थी, लेकिन अब अपने ही वादे से पीछे हट रही है। इससे शिक्षा जगत में आक्रोश उत्पन्न हो गया है। 

कहा कि शिक्षकों का मानना है सरकार हमसे सारे कार्य ले रही, यहां तक कि शिक्षक ग्रीष्मावकाश में भी ड्यूटी कर रहे हैं। शिक्षकों को महामारी में ड्यूटी लगने के बावजूद उन्हें कोरोना वैरियर्स का दर्जा नही दिया जा रहा है꫰ यही नहीं, कोई हादसा होता है तो उन्हें कोई मुआवजा तक नहीं दिया जाता, जबकि महामारी में सबसे अधिक योगदान बेसिक शिक्षकों का है। ऐसे में दिवंगत शिक्षकों के परिजनों को सरकार से अनुग्रह राशि दिलाने की बजाय एक संगठन शिक्षकों के वेतन से मदद देने जैसा विचित्र प्रस्ताव लाकर सरकार को वॉक ओवर देना चाहा है।

कहा कि राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ अपने शिक्षकों के वेतन से एक दिन की कटौती कराकर इन दिवंगत शिक्षकों के परिवारों के मदद का ऐसा कोई प्रस्ताव स्वीकार नहीं कर सकता है, जिससे शिक्षकों की जान जोखिम से डालने वाली सरकार को बचने का मौका मिल जाए। इसलिए राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उतर प्रदेश ने यह पत्र जारी करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने दिवंगत साथियों के परिवारो को सरकारी अंशदान दिलाने की अपनी लड़ाई को आगे बढ़ायेगा। 

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