शहीद मंगल पांडेय : अपनी मिट्टी के लाल को बड़ी शिद्दत से याद करेगा बलिया, ऐसी है तैयारी


बलिया। अंग्रेजी साम्राज्यवाद के विरुद्ध पहली बार सशस्त्र विद्रोह करने वाले अमर सपूत मंगल पांडेय के बलिदान दिवस पर  विविध कार्यक्रम होगा। अपनी मिट्टी के लाल को शिद्दत से बलिया याद करेगा। 
शहीद मंगल पांडेय स्मारक समिति कदम चौराहा बलिया द्वारा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अमर शहीद मंगल पांडेय के बलिदान दिवस पर कदम चौराहा स्थित स्मारक पार्क में विविध कार्यक्रमों का आयोजन 8 अप्रैल को उनके किया गया है। समिति के मंत्री राजकुमार पांडेय ने बताया कि 8 अप्रैल को सुबह 8 बजे शहीद की आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं झण्डात्तोलन होगा। तत्पश्चात परंपरागत तरीके से पुलिस प्रशासन द्वारा दिया जाने वाला गार्ड ऑफ ऑनर दिया जाएगा। इस अवसर पर स्मारक समिति द्वारा शहीद की स्मृतियों को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए स्मारक समिति द्वारा प्रकाशित 1857 की क्रांति मंगल पांडे गौरव गाथा स्मारिका का लोकार्पण किया जाएगा। 

राष्ट्रनायक मंगल पांडेय का संक्षिप्त जीवन परिचय

ज्ञात हो की 30 जनवरी 1831 को बलिया जिले के नगवां गांव में जन्मे सुदिष्ट पाण्डेय के पुत्र मंगल पांडेय 18 वर्ष की आयु में ही सेना में भर्ती हो गये। 34 नम्बर देशी पैदल सेना की 19वीं रेजिमेंट की 5वीं कम्पनी के 1446 नम्बर के सिपाही मंगल पाण्डेय ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ 29 मार्च को  बगावत कर दिया। अपनी बन्दूक से मेजर ह्यूस्टन और लेफ्टिनेंट बाब को ढेर कर मंगल पाण्डेय ने अंग्रेजों को संदेश दे दिया कि हिन्दुस्तान का सपूत जाग गया है। 8 अप्रैल को मंगल पाण्डेय को अंग्रेजो ने फांसी दे दिया, लेकिन जिस चिंगारी को मंगल पाण्डेय ने हवा दी, वह आग बन कर पूरे देश में फ़ैल गई। मंगल पाण्डेय से प्रेरणा लेकर हजारों नौजवानों ने अपने देश के लिए कुर्बानी दी। अंततः 1947 को हमारा देश अंग्रेजी दासता से मुक्त हुआ। बलिया के इस महान सपूत को जनपद वासी प्रत्येक वर्ष याद करते हैं। कोरोना संकट के बावजूद अपनी मिट्टी के लाल को पूरे मनोयोग से बलिया याद करेगा।

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