बलिया : 'माननीय' मौन, बदहाली पर आंसू बहा रहा मंगल पांडेय स्मारक व राजकीय महिला महाविद्यालय


दुबहर, बलिया। अपने खून को स्याही बनाकर देश के गौरवशाली इतिहास की पटकथा लिखने वाले शहीद-ए-आजम मंगल पांडेय को नमन करने के लिए प्रदेश तथा देश के राजनेता बलिया आते हैं। मंच से उनको नमन कर चले जाते हैं। लेकिन बलिया के नाम को अंतरराष्ट्रीय पटल पर स्वर्णिम अक्षरों से अंकित कराने वाले मंगल पांडे के पैतृक गांव नगवा में स्थापित स्मारक परिसर की सुधि लेने की फुर्सत शायद लोकतंत्र के पहरुओं के पास नहीं है। आजादी की लड़ाई में प्रथम कुर्बानी देने वाले मंगल पांडेय के घर परिवार तथा उनका स्मारक परिसर आज भी अपेक्षित है। 


2004 में प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव मंगल पांडेय की प्रतिमा का अनावरण करने के लिए उनके पैतृक गांव नगवां आए थे, तब स्मारक परिसर का जीर्णोद्धार नए तरीके से हुआ था। लेकिन वर्तमान समय में रखरखाव के अभाव में स्मारक परिसर अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। आलम यह है कि स्मारक परिसर की चाहारदीवारी कई जगहों से टूटी पड़ी है। इसके साथ ही मंगल पांडेय के पैतृक गांव नगवां में जाने वाला रास्ता भी जर्जर हो चुका है, लेकिन माननीयों को इसकी चिन्ता नहीं है। लोगों के जेहन में यह सवाल उठ रहा है कि मंगल पांडेय अपने ही गृह जनपद में इतने बेगाने क्यों है ?


ये है राजकीय महिला महाविद्यालय का हाल

कहा जाता है कि प्रतिमाएं तथा महापुरुषों के सम्मान में बने स्मारक उनके गौरवमई बलिदान की पटकता को सदैव याद दिलाती हैं। इसी सोच के साथ मंगल पांडेय के पैतृक गांव नगवां में उनके नाम पर बने राजकीय महिला महाविद्यालय बना है, जिसमें जगह जगह जंगल झाड़-झंखाड़ लगा हुआ है। इस राजकीय महिला महाविद्यालय की हालत बीमार जैसा है। सूत्रों की माने तो यहां हर साल छात्र संख्या घट रही है, जो भविष्य के लिए ठीक नहीं है। इसके अलावा और भी कई अनियमितताएं है, लेकिन पूछनहार कोई नहीं है। देश आजाद होने के बाद सूबे और देश में कई सरकारें आई और गई, लेकिन किसी भी सरकार ने इस महापुरुष के गांव को सहेजने का जिम्मा नहीं उठाया। हालांकि पूर्व मंत्री स्व. विक्रम आदित्य पांडेय के अथक प्रयास से तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव  ने अमर शहीद मंगल पांडेय के नाम पर राजकीय महिला महाविद्यालय का निर्माण कराया, जिसका लोकार्पण सपा सरकार में 2016 में पूर्व मंत्री नारद राय ने किया।

पिंकू सिंह

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