किसानों ने किया विरोध, बलिया की इस बड़ी परियोजना पर लगा ब्रेक


बलिया। गंगा नदी की धारा को मोड़ने वाली करीब 20 करोड़ रुपए की परियोजना के तहत हो रहे कार्य को बैरिया तहसील के  पांडेपुर मौजा के काश्तकारों ने रोक दिया है। काश्तकारों का आरोप है कि बिना किसी सूचना हमारी जमीन से ड्रेजिंग का कार्य कैसे शुरू हो गया ? यह सरासर अन्याय है। हम किसी भी कीमत पर अपनी कृषि योग्य भूमि से ड्रेजिंग कार्य नहीं होने देंगे। इसके लिए हमें किसी हद तक की लड़ाई क्यों न लड़नी पड़े।यह हमारे परिवार की जीविका का एकमात्र साधन है। 
पिछले साल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट के रूप में आनन-फानन में बैराज खंड वाराणसी द्वारा गंगा नदी के उस पार पचरुखिया मौजे में ड्रेजिंग कार्य शुरू हुआ।सहायक नदी भी बनी। इसके तहत करीब 3 किलोमीटर की दूरी तक 60 मीटर चौड़ा और गंगा के तलहटी से 4 मीटर नीचे तक खुदाई की गई। लेकिन हल्की सी बाढ़ में यह सहायक नदी का चैनेलाइजेशन बालू के सिल्ट में करीब 500 मीटर तक तब्दील हो गया। उसके बाद सरकार ने दूसरे चरण का कार्य यूपीपीसीएल को सौंप दिया।यूपीपीसीएल ने पचरुखिया मौजे से कार्य शुरू किया, जो पचरुखिया, मीनापुर, चौबे छपरा होते पांडेपुर मौजा में पहुंचा था। इसकी जानकारी होते ही पांडेपुर मौजे के काश्तकारों ने ड्रेजिंग कार्य को रोक दिया। विभाग पर आरोप लगाया कि बिना सूचना दिए मनमानी रूप से हमारे खेती योग्य जमीन से ड्रेजिंग कर नदी की धारा को निकाला जा रहा है, जो गलत है। कहा कि पहले हम काश्तकारों को जिला प्रशासन द्वारा नोटिस मिलनी चाहिए थी। लेकिन अब तक कोई सूचना उन्हें नहीं दी गई है। हमारी समस्याओं का समाधान निकालने के बाद ही कोई कार्य होगा। पांडेपुर निवासी काश्तकार वरुण पांडे, बसंत कुमार पांडे, रविंद्र पांडे, उपेंद्र पांडे, बजरंगबली पांडे, संत कुमार पांडे आदि ने बताया कि हम लोग किसी भी कीमत पर अपनी कृषि योग्य खेत से ड्रेजिंग कार्य नहीं होने देंगे। यह हमारी जीविका का एकमात्र साधन है। 


बैरिया तहसील के पांडेयपुर मौजा में किसानों ने काम रोका है। इस वजह से अभी कार्य बंद है, लेकिन जल्द ही किसानों से वार्ता कर हल निकालने का प्रयास किया जाएगा। फिलहाल जहां पर कोई रोक टोक नहीं है, वहां पर काम चल रहा है।
दिलीप कुमार गौर
असिस्टेंट प्रोजेक्ट मैनेजर  
सहायक परियोजना प्रबंधक कार्यदाई संस्था 

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