यूपी पंचायत चुनाव : आरक्षण को लेकर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला


लखनऊ। पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने 2021 की आरक्षण व्यवस्था पर रोक लगा दी है। सोमवार को सुनवाई के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने आरक्षण व्यवस्था के लिए वर्ष 2015 को आधार बनाने का आदेश दिया है। साथ ही 10 दिन के अंदर अपना जवाब दाखिल करने को कहा है। 
गौरतलब हो कि आरक्षण सूची जारी होने के बाद आई आपत्तियों का निस्तारण कर जिला प्रशासन अंतिम सूची जारी करने की तैयारी में जुटा था। इसी बीच लखनऊ हाईकोर्ट ने आधार वर्ष का मुद्दा उठाने वाली याचिका पर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में सीटों के आरक्षण और आवांटन को अंतिम रूप देने की कार्रवाई पर 15 मार्च तक रोक लगा दी थी।याचिका में कहा गया है कि आरक्षण लागू किये जाने के सम्बंध में वर्ष 1995 को मूल वर्ष मानते हुए 1995, 2000, 2005 व 2010 के चुनाव सम्पन्न कराए गए। 16 सितम्बर 2015 को एक शासनादेश जारी करते हुए वर्ष 1995 के बजाय वर्ष 2015 को मूल वर्ष मानते हुए आरक्षण लागू किये जाने को कहा गया। उसी शासनादेश में यह भी कहा गया कि वर्ष 2001 व 2011 की जनगणना के अनुसार अब बड़ी मात्रा में डेमोग्राफिक बदलाव हुआ है, लिहाजा वर्ष 1995 को मूल वर्ष मानकर आरक्षण लागू किया जाना उचित नहीं होगा। 16 सितम्बर 2015 के उक्त शासनादेश को नजरंदाज करते हुए 11 फरवरी 2021 का शासनादेश लागू कर दिया गया, जिसमें वर्ष 1995 को ही मूल वर्ष माना गया है। यह भी कहा गया कि वर्ष 2015 के पंचायत चुनाव भी 16 सितम्बर 2015 के शासनादेश के ही अनुसार सम्पन्न हुए थे। पूरे मामले को सुनने के बाद कोर्ट ने यह फैसला दिया। 

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