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LIC का निजीकरण देशहित में नहीं, बलिया में गूंजा विरोध का स्वर


बलिया। सरकार ने भारतीय जीवन बीमा निगम में विनिवेश का फैसला किया है। सरकार निजी बीमा कंपनियों में विदेशी भागीदारी को 49 प्रतिशत से बढ़ाकर 74 प्रतिशत करने का इरादा रखती है। लेकिन भारतीय जीवन बीमा निगम का निजीकरण देशहित में नहीं है। इन प्रस्तावित कानूनों के विरोध में देश भर से आवाजें उठ रही हैं। इसमें विरोध की सबसे मुखर आवाज बीमाकर्मियों और पॉलिसीधारकों की तरफ से आ रही हैं। इसी क्रम में बीमा कर्मचारियों के लगभग सभी संगठनों ने इस प्रस्तावित कानून के विरोध में गुुरुवार को एक दिवसीय हड़ताल का आयोजन किया। हड़ताल को अभिकर्ता संगठन ने समर्थन दिया है।

विकास अधिकारी संगठन के नेता सीबी राय ने कहा कि जिस भारतीय जीवन बीमा निगम ने अपने 65 वर्ष के इतिहास में सरकार को हमेशा मदद की है। जिसने जनता के हितों का हमेशा ख्याल रखा है, उसके निजीकरण की शुरूआत का प्रयास पूर्णतया अनुचित और जनविरोधी है। कर्मचारी संगठन नेता दिनेश सिंह ने कहा कि निगम ने अपनी पूंजी का अधिकतर हिस्सा सरकार की विभिन्न योजनाओं में निवेशित किया है। उसने जनता के पैसे को सुरक्षित भी रखा है और उसे सरकार को प्रदान कर राष्ट्र के विकास में योगदान भी सुनिश्चित किया है। ऐसे में एलआईसी के निजीकरण की शुरुआत का प्रयास समझ से परे है। सभी कर्मचारियों और अभिकर्ताओं ने एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें सरकार से इस कदम को वापस लेने की मांग की गयी। 

हड़ताल में सीबी राय, आशीष सिंह, बलराम गौड़, अजय, मनीष उपाध्याय, हीराराम गुप्ता, पवन केशरी, अनामिका उपाध्याय, ज्ञानती देवी, सुजाता श्रीवास्तव, कुबेर उपाध्याय, शिवप्रसाद शुक्ला, इन्द्रदेव सिंह, पवन तिवारी, अजय श्रीवास्तव, अजय सिंह, दिनेश सिंह, अजय तिवारी, अजीत प्रसाद,, सुदामा अहीर, हरिशंकर उपाध्याय, शिवकुमार सिंह, रामजी तिवारी, कुशकुमार गिरी, महमूद आलम, सुरेश चंद्र, अशोक गुप्ता, अनूप श्रीवास्तव, रामप्रवेश प्रसाद, आनंद मोहन, देवीप्रसाद ओझा सुरेंद्र यादव, हरीश कुमार, अर्पित टोप्पो, उमाशंकर पांडेय, रामविलास राम, अमृता, शालिनी, साक्षी जायसवाल, सूरज सिंह, संतोष यादव, राजकुमार सिंह, अमित केशरी, अंकित ओझा, निमेष, आशुतोष, शिवम, नवीन और शम्भूनाथ ओझा सहित सैकड़ों लोगों ने भाग लिया।

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