बलिया : कुछ यूं मना सदी का सबसे बड़ा शैक्षणिक महोत्सव


दुबहड़, बलिया। उत्तर प्रदेश शासन की मंशा के अनुरूप सदी का सबसे बड़ा शैक्षणिक अभियान मिशन प्रेरणा के अंतर्गत बीआरसी दुबहड़ पर गुरुवार को 'प्रेरणा ज्ञानोत्सव' का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा अधीक्षक शैलेश कुमार एवं खंड शिक्षा अधिकारी सुनील कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन एवं विद्यालय की छात्राओं द्वारा सरस्वती वंदना तथा स्वागत गीत से शुरू किया गया। मुख्य अतिथि शैलेश कुमार, एसआरजी चित्रलेखा, प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष जितेंद्र सिंह को माल्यार्पण एवं अंगवस्त्रम से सम्मानित किया गया। 



खंड शिक्षा अधिकारी सुनील कुमार ने कहा कि प्रेरणा महोत्सव शिक्षकों-शिक्षिकाओं तथा छात्र-छात्राओं के लिए शिक्षा के ज्ञान का त्यौहार है। सदी का सबसे बड़े शैक्षणिक अभियान के अंतर्गत कायाकल्प द्वारा प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शैक्षणिक पैरामीटर के अंतर्गत अधिकतर कार्य पूर्ण हो जाने के बाद अब अभिभावक सरकारी विद्यालयों में अपना नाम दर्ज कराने में गर्व महसूस कर रहे हैं। मिनट-टु-मिनट कार्यक्रम के तहत हमारे शिक्षक एवं शिक्षिकाएं शासन के निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कठिन परिश्रम कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश शासन द्वारा निर्धारित विद्यालयों के 18 पैरामीटर जैसे श्यामपट्ट, फर्नीचर, समरसेबल, मल्टीपल हैंडवाश, शौचालय, विज्ञान शौचालय आदि के अधिकतर मामलों में हमारे अधिकांश विद्यालय कोविड-19 के दुष्प्रभाव के बाद भी शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त की तरफ अग्रसर हैं। एसआरजी चित्रलेखा सिंह ने कहा कि 100 दिनों का प्रेरणा ज्ञानोत्सव हम पुनीत त्यौहार की तरह मना रहे हैं। 


प्रेरणा मिशन के अंतर्गत हमें बच्चों को ऐसी वास्तविक शिक्षा प्रदान करना है जिससे बच्चे अपने घर-परिवार एवं समाज सहित देश की सेवा कर एक सफल नागरिक बन सकें। जो विश्व के पटल पर एक प्रेरणादायक मिसाल हो। प्रेरणा ज्ञानोत्सव में शासन द्वारा निर्धारित प्रेरणा लक्ष्य को प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं, अभिभावकों और कायाकल्प के मानक पर खरा उतरने वाले शिक्षक-शिक्षिकाओं को भी सम्मानित किया गया। इस अवसर पर विद्यासागर गुप्ता, अमरेश ओझा, संतोष तिवारी, अल्ताफ अहमद, सुनील यादव, चंद्रगुप्त, अरुण कुमार, गणेश सिंह, नित्यानंद तिवारी, अजीत पांडेय, राजेश पांडेय, अनिल कुमार इत्यादि उपस्थित रहे। संचालन डॉ अब्दुल अव्वल एवं विद्यासागर गुप्ता ने संयुक्त रूप से किया।

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