बलिया : आग से दर्जनों परिवार बेघर, जिन्दा जली महिला ; मचा कोहराम


बैरिया, बलिया। गर्मी का पारा चढ़ते ही अग्निदेव का ताण्डव शुरु हो गया है। बैरिया थाना क्षेत्र के बकुल्हा नई बस्ती में गुरुवार को दोपहर बाद लगभग एक बजे अचानक आग लग जाने से एक दर्जन मड़हे जलकर राख हो गए। वही, एक महिला जिंदा जल गयी। दो बाइक, एक दर्जन साइकिल, लाखों रुपये मूल्य के सोने-चांदी के गहने, खाद्यान्न, कपड़े सहित सब कुछ जलकर खाक हो गया।
बताया जा रहा हैै कि कृष्णा बिंद के घर अचानक आग की लपटें उठी और उनका रिहायशी मड़हा धू-धू कर जलने लगा। आग की लपटों की चपेट में राजेंद्र बिंद, रामजतन बिंद, बचन बिंद, रघु बिंद, सगुल बिंद सहित एक दर्जन लोगों के मड़हे सहित सबकुछ जलकर राख हो गया है। करीब 200 लोग खुले आसमान के नीचे आ गए हैं। अगलगी की सूचना पर मौके पर पहुंचे भाजपा मंडल अध्यक्ष मंटू प्रसाद बिंद ने मौके से फायर ब्रिगेड व एसडीएम प्रशान्त कुमार नायक को सूचना दी। बावजूद फायर ब्रिगेड की गाड़ी मौके पर नहीं पहुंची। ग्रामीणों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। तब तक पूरी बस्ती जलकर खाक हो चुकी थी। एसडीएम ने मौके पर क्षेत्रीय लेखपाल मोतीलाल को नुकसान का जायजा लेने के लिए भेजा था। इस अग्निकांड में मृतका सीतादेवी (60) अपने घर से सामान निकाल रही थी, तब तक आग की लपटों में गिर गई और जलने से मौत हो गई। मृतका के शव को पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए कब्जे में ले लिया। सीता देवी के मृत्यु के बाद पूरे परिवार पूरे गांव में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है। इन अग्नि पीड़ितों का आसूं पोछने के लिए मन्टू बिंद के अलावा किसी भी दल का कोई नेता या कार्यकर्ता मौके पर नही पहुँचा है। मंटू बिंद ने जिलाधिकारी से तत्काल राहत सामग्री, तिरपाल, खाद्यान्न व अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।

ये है विडम्बना

फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों से जब पूछा गया कि इतनी बड़ी अगलगी की घटना के बावजूद आप लोग मौके पर क्यों नहीं गए तो उनका जवाब था, यहां दो चालक तैनात थे। चालक धीरेंद्र का कानपुर ट्रांसफर हो चुका है। रमेश चंद्र पांडे यहां ड्राइवर हैं, जो गाड़ी लेकर बलिया बनवाने गए हैं। जब ड्राइवर ही नहीं हैं मौके पर फायर ब्रिगेड की गाड़ी आग को बुझाने के लिए कैसे जाएगी। वही फायर ब्रिगेड कर्मचारियों ने बताया कि एक छोटी गाड़ी एक बड़ी गाड़ी बैरिया मे उपलब्ध है। छोटी गाड़ी खराब हो चुकी है। बड़ी गाड़ी हर जगह जा नहीं पा रही है। 

शिवदयाल पांडेय 'मनन'

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