क्रश को सरप्राइज : बलिया वाले 'धनजी' की वेलेंटाइन स्पेशल


करीब एक दशक पहले मेरे एक अजीज को मोहब्बत हो गयी। तब, केवल वेलेंटाइन उत्सव एक दिवसीय हुआ करता था। हफ्ते भर का लोचा नहीं था। अब मुसीबत यह कि एक ही दिन में प्रपोजल से लेकर सेलीब्रेशन तक करना होता था। उस बिचारे ने अपने क्रश को सरप्राइज देने का मन बनाया। तय दिन को सरप्राइज के साथ कार्ड भेजने का मन हुआ, लेकिन झंझट थी कि घर जाकर दे तो कैसे ? तकनीकी रूप से न तो वह खुद जवान था, न ही मोहब्बत आज जैसी ओवर स्मार्ट थी। फिर शहर के एक कोरियर वाले से डील हुआ कि 14 फरवरी को उसके पते पर डाक पहुंचा देगा। देना था सरप्राइज, सो उसने सेंडर में ऐसे ही किसी का नाम लिख दिया। यहीं लफड़ा हो गया। डाक तय समय पर पहुंच गया, लेकिन किसी अपरिचित की ओर से वेलेंटाइन कार्ड पहुंचने पर घर में हंगामा खड़ा हो गया।

अब वेलेंटाइन वीक चल रहा है। आने वाले दिनों में वेलेंटाइन के नाम पर पूरा फरवरी कुर्बान हो जाए, तो शायद ही किसी को अचरज हो। वजह भी है। अब की मोहब्बत भी इमोशन से ज्यादा इनोवेटिव हो गयी है। किसी को प्रपोज करना है, या बधाई देनी है तो उसके लिए दिल की नहीं दिमाग की जरूरत है। बाकी सारी काम की चीजें आपको गुगल महाराज आसानी से मुहैया करा देंगे। वेलेंटाइन कार्ड के साथ ही ऑडियो-वीडियो के साथ तमाम तरह के संदेश मिल जा रहे। सोशल साइट्स भी ऐसे संदेशों से भरे पड़े हैं। शहर के बुक स्टॉल पर गया, तो दुकानदार का कहना था कि अब तो कार्ड खरीदने के लिए कोई आता ही नहीं। वैसे वेलेंटाइन ही नहीं, नए साल और होली-दिवाली के लिए भी वर्चुअल सेलीब्रेशन का ही क्रेज चल रहा है। दो दिन अभी बचे हैं। सोशल प्लेटफॉर्म पर तरह-तरह के इनोवेशन देखने को मिलेंगे। यूथ का वैसे भी मोबाइल प्रेम जगजाहिर है। ऐसे में इस खास मौके को यादगार बनाने के लिए इमोशन की बजाय इनोवेशन पर ज्यादा जोर देंगेे।

धनंजय पांडेय 'धनजी', वरिष्ठ पत्रकार बलिया 

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