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बलिया में छा गये विद्यार्थी... 'आईल बसंत बहार बोलो सारा रा रा...'


दुबहड़, बलिया। 'सरिसों के पियरी संवरिया के शोभे...' व 'आईल बसंत बहार बोलो सारा रा रा...' से लोगों को भाव-विभोर करने के साथ ही गीतकार बब्बन विद्यार्थी ने बसंत पंचमी की महत्ता पर प्रकाश डाला। कहा कि बसंत पंचमी बदलते मौसम का एहसास ही नहीं, जीवन में नवस्फूर्ति का संचार करने वाला त्योहार है। बसंत ऋतु की खास विशेषताएं है। यह त्योहार न सिर्फ जीवन को उमंग से ओतप्रोत करता है, बल्कि दुःख के बाद सुख की अनुभूति भी कराता है।
खुश्बू बिखेर रहे पुष्पों पर मंड़राते भौंरों का समूह तथा कोयल की कूक बसंत का एहसास स्वतः करा देती है। सरसों के पीले फूल, धरा की हरियाली, महुएं एवं आम्रमंजरी की मादक सुगंध से प्रकृति बौराई सी प्रतीत होती है। गीतकार बब्बन विद्यार्थी ने कहा कि बसंत पंचमी का बड़ा महत्व है। इस दिन सरस्वती पूजन के साथ रंगोत्सव की शुरुआत होती है। गांव-गांव में लोग झाल, डफ व मजीरा लेकर फाग का ताल ठोकते हैं। हमें अपनी परंपरा को सहेज कर रखना होगा। अवधबिहारी चौबे, विश्वनाथ पांडेय, उमाशंकर पाठक, डॉ. सुरेशचंद्र प्रसाद, श्रीभगवान साहनी, पन्नालाल गुप्ता इत्यादि मौजूद रहे।

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