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तीन दोस्तों की मौत : नहीं थम रहा करुण-क्रंदन और चीत्कार, गांव में नहीं जले चूल्हें



बैरिया, बलिया। तीन युवकों की हाईटेंशन तार से मौत ने न सिर्फ इंसान, बल्कि बेजुबानों को भी झकझोर कर रख दिया है।तीनों युवकों के गांव दलजीत टोला में शोक की लहर है। गांव में चहुंओर मातमी सन्नाटा पसरा है। कई घरों में चूल्हे तक नहीं नहीं जले। हर चेहरा उदास है। माहौल खामोश है, जिसे चीर रहा है तो परिजनों का करुण-क्रंदन और चीत्कार।  
गौरतलब हो कि दलजीत टोला निवासी अनुज सिंह पुत्र सुनील सिंह का बर्थ-डे बुधवार (24 फरवरी) को था। इसको लेकर घर-परिवार व अनुज के दोस्तों में काफी उत्साह था। अनुज को सुबह से कई लोग बधाई भी दिये थे। शाम को बर्थ-डे सेलिब्रेशन की तैयारी थी। बर्थ-डे ब्याय अनुज अपने गांव के दोस्त सोनू गुप्ता पुत्र महेंद्र गुप्ता व छोटू सिंह पुत्र भुटेली सिंह के साथ केक खरीदने बैरिया बाजार आया था। इस बीच, उनके घर ऐसी सूचना मिली कि हर इंसानी जिगर कांप उठा। किसी को विश्वास ही नहीं हो रहा था कि उनका अनुज, छोटू और सोनू अब दुनिया में नहीं है। लेकिन सच का सामना होते ही संपूर्ण क्रांति के प्रणेता जयप्रकाश नारायण का गांव रो पड़ा। घटना के 24 घंटे बाद भी गांव में मातमी सन्नाटा पसरा है। हर आंंखों का कोर भींगा है। खूूटें पर बंधे मवेशी भी खामोश बैठे रहे। हादसे के शिकार तीनों मृतकों के घर लोग संवेदना व्यक्त करने के लिए पहुंच तो रहे है, लेकिन उनका वहां पहुंचने पर उनकी भी हिम्मत जबाब दे दे रही है। 

आखिर ऐसा हादसा कब तक ? 
लोग जयप्रकाश नारायण के आंदोलन एवं उनकी सोच को याद कर रहे है। उनका कहना है कि आज जेपी की सोच जीवंत होती तो यह घटना नहीं हुई होती। कारण की कहीं न कहीं विभागीय व प्रशासनिक लापरवाही की देन है कि तीन युवक असमय काल के गाल में समा गए। लोगों का सवाल जितने भी जिम्मेदार पद पर आसीन अधिकारी हैं, उन सब से है कि आखिर ऐसा हादसा कब तक ? जयप्रकाश नारायण के गांव के कई युवक पिछले वर्ष भी सरस्वती प्रतिमा विसर्जन के दौरान पिकप में विद्युत प्रवाह आ जाने से काल कलवित हो गए थे। ऐसे में बलिदानी धरती के लोग इस सोच में पड़ गए हैं कि आखिर इस लचर व्यवस्था का जिम्मेदार कौन है ? लोगों में आक्रोश गुब्बार मार रहा है। लोग बिजली विभाग व जनप्रतिनिधियो को कोस भी रहे है। 

शिवदयाल पांडेय 'मनन'

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