Great Work Of UP पुलिस : सड़क पर अर्द्धविक्षिप्त महिला को देख पसीजा DIG का दिल, फिर...


DIG की पहल लाई रंग, चार साल बाद महिला को मिला अपनों का संग
-यूपी पुलिस के इस सराहनीय कार्य की खूब हो रही सराहना

आजमगढ़। फरवरी 2020 के प्रथम सप्ताह में पुलिस उप महानिरीक्षक, आजमगढ़ परिक्षेत्र सुभाष चन्द्र दुबे को अपने आवास से बाहर जाने वाली सड़क पर एक मानसिक रुप से अस्थिर बुजुर्ग महिला कूड़ा-करकट के ढ़ेर पर बैठी मिली थी। संवाद करने पर उसकी भाषा दक्षिण भारत की प्रतीत हो रही थी, जो किसी की समझ में नहीं आ रही थी। महिला के बारे में कार्यालय स्टाफ और दुकानदारों द्वारा बताया गया कि वह लगभग 03-04 वर्ष से आजमगढ़ में सड़क पर स्थान बदल-बदल कर रह रही है। वह मानसिक रुप से अस्थिर होने के कारण इधर-उधर घूमती रहती है। 


पुलिस उप महानिरीक्षक ने उक्त महिला के लिए कोतवाली व महिला थाना से सम्पर्क कर समुचित प्रबन्ध कराने का निर्देश दिया गया। आजमगढ़ पुलिस द्वारा उक्त महिला को एनजीओ के माध्यम से आश्रय स्थल में रखवाया गया, किन्तु उक्त महिला पुनः वहां से निकलकर रोड पर चली गयी। ये स्थिति बारम्बार होती रही। पुनः सड़क पर उक्त महिला को देखकर पुलिस उप महानिरीक्षक ने उक्त महिला के लिए वैकल्पिक आवास, भोजन एवं वस्त्र आदि का प्रबन्ध करने के साथ ही सोशल मीडिया सहित अन्य संचार माध्यमों से उसके मूल निवास स्थान का पता करने का निर्देश दिया गया, जिस पर पुलिस ने काम भी किया। उक्त महिला को कोतवाली परिसर में बने महिला आवास में महिला सिपाही के साथ पुलिस उप महानिरीक्षक के निर्देश पर रहने लगी। भोजन, वस्त्र आदि का समय से समुचित प्रबन्ध किया गया। 

इस बीच, पुलिस द्वारा अथक प्रयास करके एक चिकित्सक (जो दक्षिण की तमिल भाषा के जानकार थे) से उक्त महिला का संवाद बारम्बार कराया जाता रहा, किन्तु उसके बारे में कोई अग्रिम सफलता नहीं मिल सकी। नाम पता के बारे में उक्त महिला को कागज कलम देने पर उसके द्वारा 02-03 मोबाइल नम्बर कागज पर लिखे गये, जिनमें से एक नम्बर पर सम्पर्क करने पर उक्त नम्बर संतोष कुमार (निवासी कोयम्बटूर, तमिलनाडु) का ज्ञात हुआ। उस नम्बर पर महिला से बात करायी गयी तो संतोष कुमार उस महिला को अपनी सास बताया। फिर पुलिस द्वारा उक्त संतोष कुमार को उक्त महिला से वीडियो कालिंग करके पहचान करायी गयी। संतोष कुमार के आजमगढ़ आने की व्यवस्था पुलिस द्वारा करायी गयी। संतोष कुमार ने आजमगढ़ कोतवाली आये, जहां पर पुलिस उप महानिरीक्षक, आजमगढ़ परिक्षेत्र, क्षेत्राधिकारी नगर व प्रभारी निरीक्षक, कोतवाली की उपस्थिति में अपनी सास की पहचान की।

ये है नागलक्ष्मी

उक्त महिला का नाम पता उसके दामाद संतोष कुमार द्वारा श्रीमती नागलक्ष्मी पत्नी स्व. सेनवग मूर्ति (निवासी नरीनपुरम, थाना एलनदुरई, जिला कोयम्बटूर, तमिलनाडु) बताया गया। उक्त श्रीमती नागलक्ष्मी के परिवार में 02 पुत्रियां मंगला चेलवी व सत्यप्रिया हैं। उनके कोई लड़का नहीं है। उक्त नागलक्ष्मी के पति का देहान्त वर्ष 2016 में हो गया था। इसके बाद नागलक्ष्मी की मानसिक स्थिति सही नहीं रही और वर्ष 2017 की गर्मियों में वह अपने घर से लापता हो गयी। उनके दामाद संतोष कुमार (जो वहां पर लेबर का कार्य करते हैं) ने अपने आस-पास के परिवेश में खोजने का भरसक प्रयास किया, किन्तु उन्हें सफलता नहीं मिली थी।

UP पुलिस को सैल्यूट

उक्त महिला लगभग पिछले 04 वर्षों से आजमगढ़ शहर के भिन्न-भिन्न स्थानों में अर्द्धविक्षिप्त स्थिति में रहकर भाषा एवं क्षेत्र से अंजान होने के कारण खुले आसमान के नीचे यत्र-तत्र विचरण एवं प्रवास कर रही थी। उक्त महिला के दामाद द्वारा पुलिस के इस मानवीय संवेदनाजनित व्यवहार पर अत्यन्त भावुक प्रतिक्रिया दी गयी। पुलिस उप महानिरीक्षक, आजमगढ़ परिक्षेत्र सहित जनपद आजमगढ़ की पूरी पुलिस टीम को उक्त महिला के परिजनों से उसे मिलाकर अत्यन्त संतोष व प्रसन्नता का अनुभव कर रही है। 

DIG ने ऐसे किया विदा

उक्त महिला नागलक्ष्मी को 01 जनवरी 2021 को जनपद गोरखपुर से कोयम्बटूर जाने वाली ट्रेन से उसके दामाद के साथ टिकट कराकर उसे भोजन एवं वस्त्र इत्यादि आवश्यक संसाधन मुहैया कराकर आजमगढ़ पुलिस द्वारा जनपद गोरखपुर के रेलवे स्टेशन से उसके गन्तव्य स्थल कोयम्बटूर के लिए रवाना करा दिया गया है।

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